मेरे कार्यकाल में अगर नोटबंदी होती, तो गवर्नर पद से इस्तीफा दे देता- रघुराम राजन

Published by September 8, 2017 | 12:00 pm
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नई दिल्ली: गवर्मेंट छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाने के प्लान पर काम कर रही है। लेकिन RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि जरूरी नहीं कि बड़े बैंक ही बेहतर सेवा दें। उन्होंने कहा, “बड़े बैंक बड़े प्रोजेक्ट को लोन दे सकते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि वे सुविधाएं भी बेहतर कर सकते हैं।”

कालेधन की पहचान करने में नोटबंदी कितनी कामयाब रही, इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।” अपनी किताब ‘I DO WHAT I DO’ के लॉन्च के मौके पर रघुराम राजन ने कहा कि अगर सरकार उनके कार्यकाल में नोटबंदी करती तो वह RBI गवर्नर पद से इस्तीफा दे देते। इसके अलावा उन्होंने कई बातें कहीं, जो की इस प्रकार हैं-

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-सरकार के पास गरीबों के आकड़ों के ना होने को लेकर उन्होंने कहा कि समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार के पास ऑथेंटिक और टाइमली डाटा होना चाहिए। योजना क्रियान्वयन और उसकी निगरानी के लिए नियमित डाटा जरूरी है। इसके बिना आप प्लान कैसे बनाएंगे?

-नोटबंदी में कालाधन लाने में कितनी सफल रही। इसपर उनका कहना है कि इस बारे में कुछ भी कहने में जल्दबाजी होगी जमा पैसों में कालाधन कितना है, इसकी जान-पड़ताल के लिए काफी मशक्कत की जरूरत है। साथ ही आम जनता को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।

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-पिछली और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की तुलना पर उन्होंने कहा कि यह कंपेयर करना मेरे लिए ठीक नहीं होगा। पिछली सरकार के टाइम ग्लोबल सिचुएशन ठीक नहीं थी। यह गवर्मेंट आई तो हालात बेहतर थे। निवेश और निर्यात तो नहीं बढ़ रहे हैं पर जीएसटी और बैंकिंग सुधार बेहतर कदम हैं।

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-सरकार के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर रघुराम राजन का कहना है कि खेती में कमाई बढ़ाने के मौके हैं। दुनियाभर में किसान कम हो रहे हैं, लेकिन जोत बढ़ रही है। हमें भी टेक्निक बेस्ड खेती अपनानी पड़ेगी। ताकि कम जगह में ज्यादा उत्पादन हो। बिचौलियों का मार्जिन भी घटाने की जरूरत है।

-बड़े बैंकों से आम कस्टमर्स के फायदों पर उनका कहना है कि बड़े बैंक बड़े प्रोजेक्ट को लोन दे सकते हैं। पर यह कहना गलत है कि बड़े बैंक ही बेहतर सेवा दे सकते हैं।

-रघुराम राजन का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी से भविष्य में टैक्स देने वाले और टैक्स, दोनों में बढ़ोतरी होगी।

-वहीं फिर से सरकार द्वारा 2000 रुपए की नोटबंदी की आशंका पर उनका कहना है कि लगातार नोटबंदी सही नहीं। इससे जनता में कंफ्यूज हो जाएगी कि वह कौन से नोट अपने पास रखे?

-‘भारतीय अर्थव्यवस्था को समझने के लिए भारतीय अर्थशास्त्री होना जरूरी है’ इस पर उनका कहना है कि अगर कोई इंडिया के किसी शहर में बैठकर डाटा के बेस पर नीति बनाता है, तो वह काम विदेश में रहने वाला भी कर सकता है।