प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रति छात्रों को आकर्षित करने में प्राविधिक शिक्षा विभाग फेल

सुधांशु सक्सेना
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों से छात्रों का मोहभंग रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रति छात्रों को आकर्षित करने में सूबे का प्राविधिक शिक्षा विभाग भी कुछ नहीं कर पा रहा है। इसी का परिणाम है कि इस बार के उत्तर प्रदेश इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (यूपीएसईई 2017) में अब तक के सबसे कम पंजीकरण हुए और इनमें से ज्यादातर ने उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों से ज्यादा भरोसा बाहर के इंजीनियरिंग कॉलेजों पर जताया है। इसके चलते इस साल भी प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों का टोटा बना रहेगा।
यूपीएसईई में पिछले पांच सालों का रिकार्ड रहा है कि इस परीक्षा में टाप मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले छात्र प्रदेश के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी संस्थानों और गिने चुने निजी कॉलेजों को छोडक़र किसी अन्य कालेज में प्रवेश लेना मुनासिब नहीं समझते हैं। इतना ही नहीं यूपीएसईई में टॉप टेन में आने वाले स्टूडेंट तो इस संस्थान के कालेजों में ही प्रवेश नहीं लेते हैं। वर्तमान में करीब 1 लाख 49 हजार 868 सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा करवाई गई है जिसमें से 1 लाख 38 हजार 245 अभ्यर्थी ही सफल हो सके हैं। उसमें भी इंजीनियरिंग की अलग-अलग विधा के टाप स्टूडेंट्स में से ज्यादातर ने आईआईटी और अन्य प्रदेशों के इंजीनियरिंग कॉलेजों की परीक्षा भी दी है।

इसके चलते इस बात की संभावना ज्यादा है कि इन अभ्यॢथयों की संख्या का एक बड़ा हिस्सा आईआईटी और अन्य सूबों के कालेजों में चला जाएगा। सिर्फ एकेटीयू से संबद्ध सरकारी संस्थानों की दो हजार पांच सौ अट्ठारह सीटों पर ही शत-प्रतिशत एडमिशन होना तय है। इसके बाद गिने चुने नामी कॉलेजों को छोडक़र सभी सीटों पर छात्रों का टोटा रहने वाला है।
2012 से लगातार अस्थिर रहे आंकड़े

उत्तर प्रदेश इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के पंजीकरण आंकड़ों पर गौर करें तो इंजीनियरिंग क्षेत्र की अलग-अलग विधाओं के लिए 2012 से लगातार आंकड़ों में अस्थिरता बनी रही। यूपीएसईई में 2012 के सत्र के लिए दो लाख 40 हजार अभ्यॢथयों ने पंजीकरण करवाया था। इसके बाद 2013 में यह आंकड़ा दो लाख 12 हजार, 2014 में दो लाख 22 हजार, 2015 में दो लाख 30 हजार, 2016 में एक लाख 95 हजार रहा। इस वर्ष 2017 के सत्र के लिए एक लाख 69 हजार 170 आवेदन हुए, जिसमें से एक लाख 56 हजार 211 अभ्यॢथयों ने परीक्षा में हिस्सा लिया और मात्र एक लाख 38 हजार 245 ही इसमें सफल हो सके।
साल्वर गिरोह के कारण खराब हुई थी छवि 

एकेटीयू के यूपीएसईई के कार्यों से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि 2011 से पहले एकेटीयू की स्थिति इतनी खराब नहीं थी। 2011 में क्राइम ब्रांच ने यूपीएसईई की परीक्षा में राजधानी के आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी कॉलेज से बड़ी संख्या में साल्वर गिरोह को पकड़ा था। इसमें एकेटीयू के सरकारी कॅालेज इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी के छात्रों और प्रोफेसरों का नाम आया था। इसके बाद उसी वर्ष एकेटीयू से संबंद्ध निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में फर्जी नामांकन के जरिये छात्रवृत्ति हड़पने का मामला भी सामने आया था। इसके चलते प्राविधिक विश्वविद्यालय और इससे संबंद्ध संस्थानों की छवि खराब हो गई थी।
इस वर्ष भी आईईटी लखनऊ में  एक पीएचडी के छात्र द्वारा खुद अपना पेपर बनाने और परीक्षा देकर कापी का मूल्यांकन करने का मामला भी सामने आया था। इससे भी संस्थान की छवि को गहरा धक्का लगा था। आईईटी के तत्कालीन निदेशक प्रो.ए.एस.विद्यार्थी ने इस घटना को आईईटी के इतिहास में काले दिवस की संज्ञा दी थी। इसके अलावा स्टूडेंट्स के प्लेंसमेंट और घिसे पिटे सिलेबस के चलते इंजीनियरिंग छात्रों के बीच उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रति आकर्षण काफी कम हो गया है।
छात्रों की सुविधा के लिए संस्थानों की रैंकिंग

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने बताया कि इस बार यूपीएसईई 2017 की परीक्षा अप्रैल में करवाई गई थी और 29 मई को इसका परिणाम घोषित किया गया है। जून में काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। छात्रों को एकेटीयू और संबंद्ध संस्थानों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। हमने छात्रों की सुविधा के लिए संस्थानों की रैंकिंग की है और उनका परफार्मेंस चार्ट तैयार किया है। हमें उम्मीद है कि इस बार हमें सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

यूपीएसईई प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रोफेसर कुलदीप सहाय ने बताया कि इस बार राज्य प्रवेश परीक्षा करवाने के लिए कुल 176 केन्द्र बनाए गए थे। इनमें 162 केन्द्र उत्तर प्रदेश में बनाए गए थे जबकि दूसरे प्रदेशों में 14 केन्द्र बनाए गए थे। दिल्ली में 5, जयपुर में 2, देहरादून में 2, मुंबई में 1, रांची में 1, पटना में 1, भोपाल में 1 और कोलकाता में एक सेंटर बनाया गया था। उन्होंने कहा कि हमें आशा है कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा अधिक प्रवेश होंगे।
प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन का कहना है कि हम किसी छात्र पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते कि आप किसी निश्चित संसथान में प्रवेश लें। हालांकि हम इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार कर रहे हैं। लगातार नए एमओयू साइन हो रहे हैं। साथ ही हम छात्रों के प्लेसमेंट और जॉब फेयर आयोजित करने पर भी ध्यान दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि छात्रों को हमारी पहल पसंद आएगी और प्रवेश बढ़ेंगे।