Opinion

हरयाणा और महाराष्ट्र के चुनावों के जो 'एक्जिट पोल' आए हैं, वे क्या बता रहे हैं? दोनों राज्यों में कांग्रेस का सूंपड़ा साफ है। विरोधी दल बुरी तरह से पटकनी खा रहे हैं।

बेटी के बड़ी होते ही उसके विवाह की चिंता माता पिता को सताने लगती है और जब कुंडली की गड़बडी की वजह से  शादी में विलंब होते हैं तो माता-पिता के लिए परेशानियां और बढ़ जाती है।अगर आप भी अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशान है

पंडित रामकृष्ण वाजपेयी, लखनऊ: देश एक तरफ 21वीं सदी में जाने की तैयारी कर रहा है। नित नए आविष्कार हो रहे हैं। कुल मिलाकर बाबा तुलसीदास ने रामचरित मानस में कही एक चौपाई हर जगह चरितार्थ होती दिख रही है कि जो इच्छा करिहो मनमाहीं राम कृपा कुछ दुर्लभ नाहीं। लेकिन संतोषं परमं सुखम को हमने भुला …

एक भाई का सुझाव था कि ऐसी फिल्म तुरंत बनाई जाए, जो करोड़ों दर्शकों को यह बताए कि यदि अगले पांच-दस साल में दक्षिण एशिया का महासंघ बन जाए तो इस इलाके का रंग-रुप कैसा निखर आएगा। यह विचार सभी देशों को एकजुट होने के लिए जबर्दस्त प्रेरणा दे सकता है।

: कहते हैं जिस घर में तुलसी होती है उस घर में सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती है।ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है। घर के आंगन में पूजनीय स्थान दिया जाता है। भगवान के भोग 56 भोग भी तुलसी के बिना अधूरा होता है। कार्तिक मास में तो तुलसी का महत्व और बढ़ जाता है।

प्रश्न यहाँ यह है कि मिलते जुलते अपराधों के लिए विषम दण्ड प्रावधान अपनाना नाइंसाफ़ी है कि नहीं ? यूं तो जेल से हर तरीके से हर कोई बाहर आना चाहेगा| वह मानवकृत नरक है| जघन्यता का चरम है| काला पानी के जेल में सावरकर ग्यारह वर्ष रहे| अन्य भारतीय जेल अंडमान जेल की तुलना में आरामगृह सरीखे ही रहे|

सवाल किसानों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार की नीयत पर शक का नहीं है लेकिन आंकड़े और हालात जो बोल रहे हैं वह तो यही कह रहे हैं कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्‍य हासिल करना बहुत ही मुश्किल है।

कांग्रेस-राकांपा की हालत खस्ता है। इनके कई सीनियर नेता पाला बदल चुके हैं। इनमें कुछ तो भाजपा या शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भाजपा के पास जरूरत से ज्यादा संभावित प्रत्याशी हो गये थे जबकि कांग्रेस और राकांपा के पास उचित प्रत्याशियों का टोटा था।

पंजाब एंड महाराष्ट्र कोआपरेटिव बैंक के तीन खाताधारकों ने अपनी जीवनलीला इसलिए समाप्त कर दी कि बैंक के डूबने का भय था। ये घटनाएं न केवल भारतीय बैंकिंग व्यवस्था पर बल्कि शासन व्यवस्था पर भी एक बदनुमा दाग हैं। आज यह स्वीकारते कठिनाई हो रही है कि देश की आर्थिक व्यवस्था को सम्भालने वाले हाथ …

जमीन के लगातार दोहन और जंगलों की कटाई से जमीन का उपजाऊ हिस्सा खत्म हो रहा है और मरुस्थलीकरण तेज होता जा रहा है। विगत कुछ दशकों में दो घटनाएं बहुत आम हो गई हैं। पहली, बर्फ का पिघलना और दूसरी, रेगिस्तान का विस्तार। दोनों ही परिघटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं और यह हमारी …