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मायावती नहीं चाहतीं लालू यादव का साथ देकर जोखिम लेना

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amanBy aman

Published on 27 Aug 2017 1:18 AM GMT

मायावती नहीं चाहतीं लालू यादव का साथ देकर जोखिम लेना
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विद्या शंकर राय

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया और पूर्व सीएम मायावती ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुखिया लालू प्रसाद यादव की बिहार की राजधानी पटना में आज (27 अगस्त) को होने वाली 'भाजपा भगाओ, देश बचाओ' रैली से ऐन वक्त पर अपने को अलग कर सबको चौंका दिया है।

बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने ही दावा किया, कि 'बिहार में महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने व सपा-लालू की नजदीकियों की वजह से मायावती अब इस गठबंधन पर भरोसा नहीं कर पा रही हैं और फिलहाल किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नही हैं।'

सपा बनी वजह

बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, 'लालू प्रसाद यादव ने जिस महागठबंधन का सपना देखा था, वह फिलहाल पूरा नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि समाजवादी पार्टी और लालू की नजदीकियों की वजह से मायावती यह तय नहीं कर पा रही हैं कि इस गठबंधन में शामिल हुआ जाए या नहीं।' उन्होंने बताया, 'दरअसल, बिहार फार्मूला कामयाब न होने की वजह से ही बहनजी जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहतीं। यूपी में सपा और बसपा एक मंच पर आते हैं, तो इसका क्या परिणाम होगा, यह अभी भविष्य की बात है। हालांकि, ये दोनों दल वर्ष 1993 में एक साथ चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बाद सपा और बसपा के गठबंधन की सरकार भी बनी थी। लेकिन अभी उस स्तर तक विश्वास का माहौल नहीं बन पा रहा है।'

नीतीश के फैसले से रैली को झटका

बसपा नेता ने बताया, 'लालू की रैली को उसी दिन झटका लग गया था, जिस दिन नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया था। यह लालू की पटना रैली के लिए सबसे बड़ा झटका था। इस झटके ने ही बसपा को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि 'भाजपा भगाओ देश बचाओ' रैली में शामिल होना सही रहेगा या नहीं।'

आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी विवेचना ...

विपक्षी नेताओं का जमघट

ज्ञात हो कि पूर्व रेलमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने 27 अगस्त को पटना में 'भाजपा भगाओ देश बचाओ' रैली का आयोजन किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस की ओर से गुलाम नबी आजाद सहित तमाम विपक्षी नेता जुटेंगे। शुरुआती दौर में यह कहा गया है कि इस रैली में नीतीश कुमार के अलावा कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व सीएम मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सहित कई लोग शामिल होंगे।

सपा-बसपा के साथ होने पर दिखती अलग तस्वीर

पटना रैली के बहाने ही विपक्षी एकता और महागठबंधन का प्रचार-प्रसार जोर-शोर से किया गया। इससे भी ज्यादा दिलचस्प यह था कि अगर पटना में होने वाली रैली में अखिलेश और मायावती एक मंच पर होते तो फिर वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में यूपी में एक अलग तस्वीर दिखाई देती। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उप्र में कांग्रेस दो, बसपा शून्य और सपा को पांच लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। ऐसे में इस एकता को खासतौर पर लोकसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा था।

मायावती जल्द करेंगी जनसभाएं

बसपा के पदाधिकारी की मानें, तो 'मायावती पटना की रैली में भले ही शामिल न हो रही हों, लेकिन गुजरात चुनाव से पहले वह बड़े पैमाने पर जनसभाएं करेंगी। वैसे इस बात की संभावना है कि गुजरात के बलसाड में कांग्रेस की प्रस्तावित संयुक्त रैली में मायावती शामिल हो सकती हैं। इधर, बसपा के अन्य सूत्रों का कहना है कि मायावती दलितों के मुद्दे पर ही राज्यसभा से इस्तीफा दे चुकी हैं। इसलिए दलित एजेंडे पर 18 सितंबर से वह पूरे यूपी में भी मंडलीय स्तर पर जनसभाएं शुरू करेंगी।'

लाभ की स्थिति में ही माया आएंगी आगे

बीबीसी के पूर्व पत्रकार और नार्थ ब्लॉक-साउथ ब्लॉक के संपादक दुर्गेश उपाध्याय ने आईएएनएस को बताया, 'मायावती सीटों के बंटवारे पर रुख स्पष्ट होने के बाद ही रैली में जाने की बात कर रही हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मायावती इस बात को बखूबी जानती हैं कि इस तरह के मोर्चे में शामिल होकर या रैली में हिस्सा बनकर तब तक कोई लाभ नहीं होने वाला जब तक सीटों के तालमेल पर कोई सहमति न बन जाए।'

जाहिर सी बात है, कि मायावती अपना वजूद बचाकर रखना चाहती हैं। वह ये तो चाहती हैं कि विपक्षी एकता में उनकी हिस्सेदारी हो, लेकिन वह स्पष्ट हो। बिहार में नीतीश और लालू के बीच गठबंधन का फार्मूला टूटने के बाद वह जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाना नहीं चाहतीं।

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अमन कुमार, सात सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। New Delhi Ymca में जर्नलिज्म की पढ़ाई के दौरान ही ये 'कृषि जागरण' पत्रिका से जुड़े। इस दौरान इनके कई लेख राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और कृषि से जुड़े मुद्दों पर छप चुके हैं। बाद में ये आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। इस दौरान ये फीचर यूनिट का हिस्सा बने और कई रेडियो फीचर पर टीम वर्क किया। फिर इन्होंने नई पारी की शुरुआत 'इंडिया न्यूज़' ग्रुप से की। यहां इन्होंने दैनिक समाचार पत्र 'आज समाज' के लिए हरियाणा, दिल्ली और जनरल डेस्क पर काम किया। इस दौरान इनके कई व्यंग्यात्मक लेख संपादकीय पन्ने पर छपते रहे। करीब दो सालों से वेब पोर्टल से जुड़े हैं।

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