आरक्षण समीक्षा को लेकर गलत समय पर आया संघ का बयान, सकते में बीजेपी

आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार को राजस्थान के लिटरेचर महोत्सव में कहा कि अब आरक्षण की समीक्ष्रा किए जाने का वक्त आ गया है। आरक्षण किसी भी देश के लिए ठीक नहीं होता और इससे अलगाववाद को बढावा मिलता है।

Published by zafar Published: January 21, 2017 | 1:42 pm
Modified: January 21, 2017 | 1:53 pm
आरक्षण समीक्षा को लेकर गलत समय पर आया संघ का बयान, सकते में बीजेपी
VINOD KAPOOR

लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने एक बार फिर आरक्षण की समीक्षा का बयान दे दिया जो गलत समय पर आया। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उतरने जा रही बीजेपी इस बयान से सकते में आ गई है।

सकते में बीजेपी
यूपी बीजेपी के सकते में होने का आलम ये है कि कोई भी नेता इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं। हालत तो ये कि एक नेता ने यहां तक कह
दिया कि उन्हें ऐसे किसी बयान की जानकारी नहीं और न उन्होंने इसे कहीं देखा या पढा है।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार 20 जनवरी को राजस्थान के जयपुर में लिटरेचर महोत्सव में कहा कि अब आरक्षण की समीक्ष्रा किए जाने का वक्त आ गया है। संविधान में आरक्षण की व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि अति पिछडों ओर समाज के दबे कुचले लोगों को आगे आने का मौका मिले लेकिन हमेशा के लिए आरक्षण किसी भी देश के लिए ठीक नहीं होता और इससे अलगाववाद को बढावा मिलता है। आरक्षण की जगह पर ऐसी व्यवस्था लाने की जरूरत है जिसमें सभी को समान अवसर और शिक्षा मिले।

हालांकि बीजेपी और आरएसएस के बडे नेताओं के दबाव में उन्होंने पलटी मारी और कहा कि उनका बयान अल्पसंख्यक आरक्षण को लेकर था जिसे गलत तरीके से पेश किया गया।

बिहार चुनाव के समय भी आया था बयान
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी बिहार विधासभा चुनाव के ठीक पहले यही बयान दिया था कि आरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए। मोहन भागवत के बयान ने बिहार में बीजेपी के लिए जीती बाजी पलट दी थी। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मोहन भागवत के इस बयान को लपक लिया था और वहां के मतदाताओं को ये समझाने में सफल हो गए थे कि बीजेपी आरक्षण को खत्म करना चाहती है। नतीजा सबके सामने है कि बीजेपी जीती बाजी हार गई।

यूपी और पंजाब के चुनाव में दलित वोट सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मनमोहन वैद्य के बयान पर भी बसपा प्रमुख मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि बीजेपी की सरकार आरएसएस के इशारे पर चलती है। उनका बयान निंदनीय भी है और संविधान के विपरीत भी। केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद बीजेपी की नीति निर्धारक संस्था आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने भी समीक्षा की आड़ में इस व्यवस्था को खत्म करने की बात कही थी लेकिन जबरदस्त विरोध के कारण इसे वापस लेना पडा था।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी इस बयान के आधार पर केंद्र सरकार, बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोला है। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इससे आरएसएस और बीजेपी का दलित विरोधी चेहरा सामने आ गया है। जबकि सपा के गौरव भाटिया ने कहा कि बीजेपी आरएसएस की आड में ध्रुवीकरण चाहती है ताकि चुनाव में इसका फायदा मिले।

अंबेडकर ने भी कहा था कि आरखण खत्म हो
संविधान में दलितों, पिछडों के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने वाले बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने भी कहा था कि एक समय के बाद आरक्षण खत्म कर दिया जाना चाहिए ताकि समाज के सभी वर्गों को आगे बढने का समान अवसर मिले। हालांकि उनकी बात नहीं मानी गई ओर इसे स्थाई कर दिया गया। आरक्षण की समीक्षा हो इसे सभी वर्ग सही मानते हैं लेकिन इस बयान की टाइमिंग पर सवाल उठ खडे हो रहे हैं। क्या ऐसा बयान बीजेपी को यूपी चुनाव में भी बिहार की तरह महंगा पडने जा रहा है?

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