आईपीएस जे रविंद्र गौड़ के खिलाफ बरेली एनकाउंटर केस में सम्मन जारी

लखनऊ: सीबीआई के स्पेशल जज राजेश कुमार, द्वितीय ने एक फर्जी एनकाउंटर केस में वरिष्ठ आईपीएस अफसर जे रविंद्र गौड़ पर आरेाप तय करने के लिए उनको जरिये समन 24 अक्टूबर को तलब किया है। गौड़ मौजूदा समय में मुरादाबाद में पीएसी की नवीं बटालियन में एसपी के पद पर तैनात हैं।

यह मामला बरेली के दवा व्यवसायी मुकुल गुप्ता के कथित फर्जी इनंकाउंटर से जुड़ा है जिसमें गौड़ समेत नौ पुलिसवाले आरोपी हैं।

गत पांच अक्टूबर को इस मामले का एक मुल्जिम अनिल कुमार सीबीआई की विशेष अदालत में उपस्थित था। लेकिन गौड़ अनुपस्थित थे। जबकि अन्य मुल्जिमों की ओर से हाजिरी माफी की अर्जी दी गई थी। अदालत को गौड़ के वकील ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई निर्देश प्राप्त नहीं है। जबकि इससे पहले संज्ञान के वक्त जे रविंद्र गौड़ अपने जरिए वकील अदालत में उपस्थित थे।

सीबीआई के विशेष जज राजेश कुमार, द्वितीय ने अपने आदेश में कहा है कि चूँकि चार अप्रैल 2016 को पारित सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दौरान विचारण जे रविंद्र गौड़ की गिरफ्तारी पर रोक है। लिहाजा उनके विरुद्ध समन जारी हो। कोर्ट ने मुल्जिमों पर आरोप तय करने के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय की है।

दरअसल, 26 अगस्त, 2014 को सीबीआई ने इस फर्जी इनकाउंटर के मामले में नौ पुलिस वालों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। लेकिन शासन से अभियोजन अनुमति के अभाव में मुल्जिम जे रवींद्र गौड़ के खिलाफ सीबीआई आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी थी। 24 सितंबर, 2013 को शासन ने गौड़ के खिलाफ मांगी गई अभियोजन अनुमति को खारिज कर दिया था। जिस पर मृतक मुकुल गुप्ता के पिता ब्रजेन्द्र कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

27 मई, 2014 को हाईकोर्ट ने शासन को अपने निर्णय पर पुर्नविचार करने को कहा। लेकिन 21 नवंबर, 2014 को शासन ने एक बार फिर से अभियोजन की अनुमति खारिज कर दी। तब ब्रजेन्द्र कुमार गुप्ता एक बार फिर से हाईकोर्ट गए। 26 फरवरी, 2014 को हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जे रविन्द्र गौड़ के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी आवश्यक है अथवा नहीं इसका फैसला उचित स्तर पर खुद संबधित अदालत करेगी।

हाईकोर्ट के इस आदेश को गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चार अपै्रल, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के उक्त आदेश की पुष्टि कर दी। लेकिन साथ ही दौरान विचारण गौड़ की गिरफ्तारी पर रोक भी लगा दी।
इसके बाद 9 दिसंबर, 2016 को सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलू मैनवाल ने जे रवींद्र गौड़ व तत्कालीन कांसटेबिल गौरीशंकर विश्वकर्मा एवं जगबीर सिंह के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, आपराधिक षडयंत्र रचने, मिथ्या साक्ष्य व इनकाउंटर की झूठी कहानी बनाने के आरोप में संज्ञान लिया। जबकि तत्कालीन एसआई देवेंद्र कुमार शर्मा, विकास सक्सेना, मूला सिंह व एसआई आरके गुप्ता के अलावा कांसटेबिल वीरेंद्र शर्मा व अनिल कुमार के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र रचने, मिथ्या साक्ष्य व इनकाउंटर की झूठी कहानी बनाने के आरोप में संज्ञान लिया था। वहीं इस मामले के एक मुल्जिम कांसटेबिल कालीचरण की मौत होने पर उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही खत्म कर दी थी।
आठ मार्च, 2017 को उन्होंने आरोप पत्र पर संज्ञान के बाद जे रवींद्र गौड़ समेत सभी मुल्जिम पुलिस वालों का मुकदमा कमिट कर ट्रायल के लिए सत्र अदालत को भेज दिया था।
यह है मामला
30 जून, 2007 को बदांयू के रहने वाले दवा व्यवसायी मुकुल गुप्ता की बरेली पुलिस ने रुकुमपुर, माधवपुर रेलवे स्टेशन थाना फतेहगंज के पश्चिमी क्षेत्र में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर हत्या कर दी थी। जिसकी एफआईआर मृतक के पिता बृजेंद्र कुमार गुप्ता की अर्जी पर अदालत के आदेश से दर्ज हुई थी। अपनी अर्जी में उन्होंने बरेली के तत्कालीन सहायक पुलिस अधीक्षक जे रवींद्र गौड़ समेत अन्य पुलिस वालों को मुल्जिम बनाया था। उनका आरोप था कि आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन प्राप्त करने के लिए गौड़ ने इस कार्य की योजना बनाई थी। लेकिन इस मामले की जांच गलत दिशा में होने का आरोप लगाकर उन्होंने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए 26 फरवरी, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।