दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति बोले- कभी करता था हिंदी का विरोध, बाद में समझा महत्व

 कानपुर: चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAUK) के 19वें दीक्षांत समारोह में सोमवार (4 नवंबर) को भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश यूपी के राज्यपाल रामनाईक ने की। दीक्षांत समारोह का उद्घाटन उपराष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आरंभ किया।

दीक्षांत समारोह में कुलपति सुशील सोलोमन कानपुर सांसद मुरली मनोहर जोशी और कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही भी मौजूद थे। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक की ओर से 31 छात्र-छात्राओं को मेडल, 14 को बुक पुरस्कार 431 को डिग्री प्रदान की गई। साथ ही नरेंद्र सिंह राठौड़ और श्री पांडेय को डॉक्टरेट ऑफ साइंस की उपाधि से नवाजा गया।

क्या कहा उपराष्ट्रपति ने?
उपराष्ट्रपति वन्कैया नायडू ने भाषण में सीएसए के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, कि ‘मैं खुद एक किसान पुत्र हूं और मुझे बड़ी खुशी हो रही है, कि मैं इस कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित हूं। उन्होंने अपने भाषण में जहां कृषि के विकास और गांव की आधारभूत ज़रूरतों पर सरकार का ध्यान खींचा। वहीं दूसरी ओर कहा, कि स्कूलों में कृषि और संस्कृति को सिलेबस में शामिल करेंगे।

मातृ भाषा हिंदी को सम्मान देने और प्राथमिकता देने की बात कही। उप राष्ट्रपति ने कहा, कि मैं अंग्रेजी विरोधी नही हूं लेकिन चाहता हूं  कि आप सब अपनी मात्र भाषा को भी न भूलें। साथ ही उपराष्ट्रपति ने कहा, कि वो खुद छात्रकाल में हिंदी विरोधी आंदोलन में हिस्सा ले चुके हैं।। लेकिन दिल्ली आकर उन्हें हिंदी की महत्ता समझ में आई है। उन्होंने कृषि व्यवस्था और कृषि विकास की बात करते हुए वंदे मातरम पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, कि वंदे मातरम भारत माता को सलाम है, इस पर किसी को भी आपत्ति नही होनी चाहिए।

कृषि और देश की हो उन्नति
चार गोल्ड मेडल विजेता कृषक पुत्र बीएससी एग्रीकल्चर छात्र कृष्ण कुमार ने कॉलेज और विश्विद्यालय दोनो स्थानों पर टॉप किया। छात्र कृष्ण कुमार ने कहा कि वो एग्रीकल्चर में आगे रिसर्च करते हुए ऐसी दवा इजात करना चाहता है। जिससे फसलों को कीट कम लगें और फसल ज्यादा हो जो कषि और देश की उन्नति में सहायक है।