पंक्चर बना कर पिता ने भरी फीस, नेशनल अवार्ड हासिल कर बेटी ने दिया पिता को तोहफा

बेटी कंचन ने 10वीं में 95.6 प्रतिशत अंक हासिल किये तो परिवार फूला नहीं समाया था। स्कूल ने भी उसकी फीस माफ़ कर दी। पहली मई को परिवार के पास डीएम कानपुर ने फोन कर सूचना दी कि कंचन को डॉ आंबेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए चुना गया है।

कानपुर: चाय बेचने और दो पहिया वाहनों के पंक्चर बनाने वाले परिवार के लिए यह बेहद खुशी का मौका है। परिवार की बेटी ने पिता की मेहनत को सफल कर दिखाया। 2015 की दसवीं परीक्षा में बेटी ने 95.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किये थे।

डॉ. आंबेडकर प्रतिष्ठान भारत सरकार की तरफ से मेरिट अवार्ड के लिए चुने गये छात्र-छात्राओं में इस बेटी ने पहला स्थान प्राप्त किया है। बेटी कंचन वर्मा को जिलाधिकारी ने अवार्ड और 60 हजार रुपये की उपहार राशि से नवाजा।

गुदड़ी के लाल
मूलरूप से कानपुर देहात के मूसानगर गांव निवासी प्रेम शंकर वर्मा (45) पनकी फैक्ट्री एरिया में चाय की एक छोटी सी गुमटी चलाते हैं।
सन 2000 में गरीबी से तंग आकर वह पनकी आ गये थे और सड़क के किनारे झोंपड़ी डाल कर पंक्चर बनाने लगे थे। लेकिन निगम ने झोंपड़ी गिरा दी।
कुछ पैसे जोड़े थे, उसी से एक कमरा किराये पर लेकर जीवन फिर शुरू किया। फिर पंक्चर के साथ कम पूंजी में ही चाय बेचना शुरू की।

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परिवार में पत्नी राम सखी (40), बेटी रंजना (17), बेटी कंचन (15) और बेटा हेमंत (10) हैं। पत्नी चाय की दुकान में पति का हाथ बंटाती हैं।
तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए पति-पत्नी सुबह से रात तक मेहनत करते हैं। रंजना ने इस वर्ष इंटर की परीक्षा दी है। कंचन 11वीं में है और बेटा 5वीं में।

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मेहनत का फल
बेटी कंचन ने 2015 की 10वीं परीक्षा में 95.6 प्रतिशत अंक हासिल किये तो परिवार फूला नहीं समाया था। स्कूल ने भी उसकी फीस माफ़ कर दी थी।
और अब, पहली मई को परिवार के पास डीएम कानपुर ने फोन कर सूचना दी कि कंचन को डॉ आंबेडकर नेशनल मेरिट अवार्ड के लिए चुना गया है।
इसके बाद तो परिवार में त्योहार जैसा माहौल है। बधाई के लिए पासपड़ोस, रिश्तेदार और स्कूल वालों का तांता लगा है।

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बच्चे भी माता-पिता की की मेहनत का मान रख कर पढ़ाई में कड़ी मेहनत करते हैं।
अब कंचन की उपलब्धि ने परिवार का हौसला बढ़ा दिया है।
कंचन को भरोसा है वह इंटर में भी मेरिट में जगह बनाएगी और आगे चल कर डॉक्टर बनेगी।

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