योगी सरकार में लगा किसानों को ‘करंट’, इस वजह से चुनाव बाद दिया ‘झटका’

यूपी के किसानों को अब बिजली के लिए ज्‍यादा पैसे चुकाने होंगे। बमुश्किल अपनी रोजी रोटी चलाने वाले किसानों को योगी सरकार ने ‘झटके’ देना शुरू कर दिया है। यूपी विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की जिन बढ़ी कीमतों को गुरुवार को घोषित किया है। उसके बाद हाशिए पर जीवन जी रहे बुंदेलखंडी किसानों से लेकर प्रदेश के बाकी किसानों को इसे चुकाने में नाको चने चबाने पड़ सकते हैं। यूपी एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन एस. के. अग्रवाल के मुताबिक वर्तमान बिजली दरों में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी की गई है।

Published by priyankajoshi Published: November 30, 2017 | 5:33 pm
Modified: November 30, 2017 | 6:22 pm

लखनऊ: यूपी के किसानों को अब बिजली के लिए ज्‍यादा पैसे चुकाने होंगे। बमुश्किल अपनी रोजी रोटी चलाने वाले किसानों को योगी सरकार ने ‘झटके’ देना शुरू कर दिया है।

यूपी विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की जिन बढ़ी कीमतों को गुरुवार (30 नवंबर) को घोषित किया है। उसके बाद हाशिए पर जीवन जी रहे बुंदेलखंडी किसानों से लेकर प्रदेश के बाकी किसानों को इसे चुकाने में नाको चने चबाने पड़ सकते हैं। यूपी एनर्जी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन एस. के. अग्रवाल के मुताबिक वर्तमान बिजली दरों में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी की गई है।

शायद निकाय चुनाव खत्‍म होने का था इंतजार
यूपीईआरसी के चेयरमैन एस. के. अग्रवाल ने बताया कि कई महीने पहले से बढ़ी हुई दरों पर होमवर्क किया जा रहा था। दो महीने पहले गांव में बिना मीटर वाले कस्‍टमर्स यानि किसानों का फिक्‍स चार्ज 600 रुपए तक करने के बारे में विचार हो रहा था। जिसे अब 300 रुपए किया गया है। इतना ही नहीं ग्रामीण अनमीटर्ड (कमर्शियल ) उपभोक्ताओं को 600 की बजाय 1000 रुपए प्रति यूनिट प्रतिमाह देना होगा। ग्रामीण उपभोक्ताओं को पहली 100 यूनिट की बिजली 3 रुपए प्रति यूनिट में मिलेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि शायद सरकार को निकाय चुनाव में वोटिंग खत्‍म होने का इंतजार था, जो इसके ठीक बाद बढ़ी हुई दरों की घोषणा की गई है।

बुंदेलखंडी किसानों के लिए सुझाया रास्‍ता
यूपीईआरसी के चेयरमैन एस. के. अग्रवाल ने बताया कि विद्युत नियामक आयोग की मजबूरी होती है। लागत पर 15 प्रतिशत लेना ही पड़ता है। किसी क्षेत्र विशेष के लिए छूट देने का अधिकार कमीशन के पास नहीं है। जहां तक बुंदेलखंड में संकटग्रस्‍त किसानों की बात है। राज्‍य सरकार धारा 65 के तहत वहां के किसानों को अनुदान दे सकती है। अब देखना ये है कि जो अनुदान की गेंद आयोग ने राज्‍य सरकार के पाले में डाली है, उसका सामना सरकार कैसे करती है।