WHAT! हिलेरी ने नहीं बल्कि जॉर्ज मैलोरी ने एवरेस्ट पर पहली बार किया था फतह

विनोद कपूर

लखनऊ: सर्वमान्य तथ्य है कि एवरेस्ट पर फतह 29 मई 1953 को एडमण्ड हिलेरी और तेनजिंग शेरपा ने किया था लेकिन अगर यह कहा जाय कि एवरेस्ट पर फतह जॉर्ज मैलोरी और उनके सहयात्री सैंडी इरविन ने 08 जून 1924 को हीं कर लिया था तो आप सहसा विश्वास नहीं करेंगे।

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तथ्यों की मानें तो एडमण्ड हिलेरी और तेनजिंग शेरपा से 65 साल साल पहले हीं यह कारनामा किया था। अपनी पुस्तक ‘The wildest dream, Conquest of Everest’ में मार्क मेकेंजी ने तथ्यों का हवाला देते हुए यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि जार्ज मैलोरी व सैंडी इरविन ने हीं सर्व प्रथम एवरेस्ट फतह किया था।

धब्बों की तरह बढ़ते हुए दिखे थे जॉर्ज मैलोरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 08 जून 1924 को जॉर्ज मैलोरी और सैंडी एरविन दो धब्बों के रुप में आगे पीgeorge malloryछे एवरेस्ट की तरफ बढ़ते दिखे थे। तभी बादलों का एक हुजूम आया और सब कुछ अदृश्य हो गया। वर्ष 1999 में पर्वतारोही कोनार्ड एंकर ने एवरेस्ट से महज 800 फुट की दूरी पर जॉर्ज मैलोरी का शव खोज निकाला था।

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ब्रिटेन के पर्वतारोहण के एक विशेषज्ञ ग्राहम होयलैण्ड ने भी यह दावा किया है कि एवरेस्ट पर प्रथम फतह हासिल करने वाले जॉर्ज मैलोरी और उनके साथी सैंडी इरविन थे। एवरेस्ट की चढ़ाई के बाद लौटते समय वे हादसे के शिकार हो गये थे। ऐसी जानकारी उसने अपने तीन दशक के शोध के बाद दी है। ग्राहम होयलैण्ड आठ बार एवरेस्ट पर आरोहण कर चुके हैं। उन्हें पर्वतारोहण का गहरा ज्ञान है। होयलैण्ड जॉर्ज मैलोरी के पर्वतारोही दल में मिशनरी डाक्टर के रुप में भी शामिल थे।

जॉर्ज मैलोरी ने पत्नी से किया था वादा

जॉर्ज मैलोरी ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वे अगर एवरेस्ट फतह कर लेंगे तो वे उनका (पत्नी का )फोटो एवरेस्ट पर छोड़ आएंगे। उनका यह कृत्य अपनी पत्नी के प्रति स्नेह का प्रतीक होता। जब 75 साल बाद 1999 में उनकी लाश मिली तो उनके बटुए में उनकी पत्नी का फोटो नहीं था। मतलब सीधा था। वे एवरेस्ट चढ़े थे।

वहीं, अपनी पत्नी का फोटो छोड़ आए थे। दूसरी बात यह कि उन्होंने अपना चश्मा नहीं पहना था। नीचे उतरते वक्त पर्वतारोही चश्मा नहीं पहनते। स्पष्ट है कि वे एवरेस्ट फतह कर नीचे उतर रहे थे। उतरते समय वे बर्फ के तूफान में फंस गये, जिसकी वजह से उनकी मृत्यु हो गयी।

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मगर जॉर्ज मैलोरी का कैमरा नहीं मिला। अगर कैमरा मिल जाता तो वह उनके एवरेस्ट विजय का पक्का सबूत होता। कैमरे में मौजूद फोटो उनके एवरेस्ट विजय की कहानी बताते। हो सकता है कि वह कैमरा उनके साथी सैंडी इरविन के पास हो। सैंडी इरविन की भी लाश नहीं मिली।