इनवेस्टर्स समिट: उत्तर प्रदेश में खुलने को है उम्मीदों की राह

रतिभान त्रिपाठी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रियों के समूह के साथ मंथन कर रहे हैं। राजधानी दुल्हन की तरह सजाई जा रही है। अफसरों को टास्क दिया जा चुका है। कानून व्यवस्था सुधार को सख्ती है। बैठकों में देर रात तक माथापच्ची चल रही है। सबकी छुट्टियां निरस्त की जा चुकी हैं। बड़े शहरों में रोड शो कर उद्यमियों को यूपी आने का न्यौता भेजा जा चुका है। माहौल सकारात्मक है। कलेक्टर अपने अपने जिलों से जमीनों और उद्यमों का हिसाब किताब भेज रहे हैं।

ढाई लाख करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव : प्रदेश सरकार को अब तक २.५३ लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। मुम्बई में हुए रोड शो में ही १.२५ लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव सरकार को मिला है। इस रोड शो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। उन्होंने मुकेश अंबानी और रतन टाटा समेत कई बड़े उद्योगपतियों और बैंकर्स से मुलाकात की थी। आदित्य बिड़ला समूह के मुखिया वहां नहीं पहुंच पाए तो लखनऊ आकर मुख्यमंत्री से मिले और निवेश प्रस्ताव दिया।

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पांच साल में पांच लाख करोड़ निवेश कराने की सोच : सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रयास शुरू किए। इसी क्रम में पहले नई औद्योगिक नीति लाई गई। फिर 13 कॉमर्शियल कोर्ट की स्थापना की घोषणा की गई। इसके बाद राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के गठन किया गया और लगातार विभिन्न राज्यों में रोड शो किये गये। राज्य सरकार का लक्ष्य पांच वर्ष में पांच लाख करोड़ का निवेश कराने का है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में निवेश के जरिए रोजगार के बीस लाख अवसर सृजित करने का संकल्प लिया है।

हर क्षेत्र में निवेश की उम्मीद : इन्वेस्टर समिट के पहले रोड शो आदि में उद्यमियों के साथ बैठकें हुयीं जिनमें आईटी, ऊर्जा, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स, विनिर्माण, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपतियों एवं उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सरकार के मुताबिक दिल्ली के रोड शो में 27,000 करोड़ रुपये, बंगलुरु में 6,000 करोड़ रुपये और हैदराबाद के रोड शो में 11,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सरकार को मिले हैं।

12 सत्रों में बांटा गया कार्यक्रम : इनवेस्टर समिट में निवेशकों ने आईटी, खाद्य प्रसंस्करण, वैकल्पिक ऊर्जा, ऊर्जा, टेक्सटाइल, औद्योगिक विकास, पशुधन, दुग्ध विकास, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, परिवहन, सिंचाई और फिल्म के क्षेत्र में निवेशकों ने रुचि दिखाई है। समिट के दौरान कौशल विकास के लिए एक विशेष सत्र अलग से रखा जाएगा। दो दिन तक चलने वाले समिट के दौरान 12 सत्र होंगे। इस समिट के मुख्य पार्टनर फिक्की और सीआईआई  हैं। आईआईटी और आईआईएम को भी विशेष पार्टनर बनाया गया है। इस समिट के कंट्री पार्टनर नीदरलैंड, फिनलैंड और चेक गणराज्य होंगे।