B’Day spl : कभी IAS बनना चाहती थीं माया, आज मना रही हैं अपना 61वां जन्मदिन

फाइल फोटो

फाइल फोटो

लखनऊ: साल 2008 में फोर्ब्स की ओर से दुनिया के 100 पॉवरफुल लोगों की सूची में 59वें स्थान पर रहीं बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती सोमवार 15 जनवरी को अपना 61वां जन्मदिन पूरी सादगी से मना रही हैं। अमेरिका की न्यूजवीक मैगजीन ने उन्हें भारत का बराक ओबामा भी कहा था। हर साल की तरह इस बार न कोई तामझाम होगा और ना ही 1000 और 500 के नोटों की माला। नोटबंदी और चुनाव को लेकर जारी आचार संहिता के कारण मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ता अपना काम करें और साधारण केक काट कर जन्मदिन मनाएं।

सादगी से मनाएं जन्मदिन: मायावती
वैसे तो हर साल मायावती अपना जन्मदिन धूमधाम से मनाती रही हैं। बसपा उन्हें जन्मदिन पर नगद उपहार दिया करती थी। जो रकम करोड़ों में पहुंच जाया करती थी, लेकिन नोटबंदी के कारण इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा। विधानसभा चुनाव के बाद पांचवीं बार सीएम बनने का सपना पाल रहीं मायावती अब तक चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।  हालांकि बसपा के एक ऑडिनेटर का कहना है कि जन्मदिन मनाना पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन हम कार्यकर्ताओं को इसे मनाने से नहीं रोक सकते। हालांकि कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि जन्मदिन पर मिठाई का वितरण नहीं करें और न गरीबों में कंबल बांटे जैसा कि हर साल होता रहा है।

आगे की स्लाइड में आईएस बनना चाहती थीं माया … 

राजनीति में उदय एक चमत्कार से कम नहीं
15 जनवरी 1956 को जन्मीं मायावती का राजनीति में उदय एक चमत्कार से कम नहीं है। बसपा के संस्थापक कांशीराम उन्हें राजनीति में ले आए जबकि वो आईएस बनना चाहती थीं।कांशीराम ने उनके अंदर एक आग देखी और कहा तुम्हें वो बनना है, जिसके आगे पीछे आईएएस चलें।

1995 में पहली बार यूपी की सीएम बनीं थी
मायावती 1995 में पहली बार यूपी की सीएम बनीं। वो देश की पहली कम आयु की दलित सीएम थीं। पहले तीन बार सीएम बनने में बीजेपी का बड़ा योगदान था। साल 1995, साल 1997 और 2002 में वो बीजेपी की मदद से सीएम बनीं, लेकिन 1997 को छोड दोनों बार बीजेपी ने उनसे समर्थन वापस ले लिया था। साल 1997 में बीजेपी के साथ उनका समझौता छह-छह महीने के मुख्यमंत्री वाला था। मायावती ने अपना छह महीना तो पूरा कर लिया, लेकिन बीजेपी की ओर से कल्याण सिंह के सीएम बनने के एक महीने बाद ही उन्होंने सपोर्ट वापस ले लिया । साल 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा बहुमत में आई और मायावती पूरे पांच साल सीएम रहीं, लेकिन 2012 में ​हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी हार गई। अभी वो राज्यसभा की सदस्य हैं।