‘प्रभु’ की अगली कोशिश अल्ट्रा हाई स्पीड ट्रेन, 12 घंटे में पहुंचेंगे मनचाही जगह पर

Published by aman Published: September 3, 2016 | 6:34 pm
Modified: September 3, 2016 | 6:37 pm
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नई दिल्ली: भारतीय रेल में जब रफ्तार की बात आती है तो बीते चार दशकों से राजधानी और शताब्दी ट्रेनों पर ही चर्चा होती है। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रतिघंटा है, जिसे आज तक बढ़ाया नहीं जा सका। हालांकि इस पर कई बार मंथन जरूर हुआ। इन हालात के मद्देनजर रेलमंत्री सुरेश प्रभु देश में अल्ट्रा हाई स्पीड चलने के उपाय तलाशने शुरू कर दिए हैं। यदि ऐसा हो जाता है तो हमारे देश में भी 350-500 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगी।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस योजना को साकार करने के लिए ‘अल्ट्रा हाई स्पीड रोलिंग स्टॉक’ पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कराया है। उन्होंने बताया कि इन हाई स्पीड ट्रेनों के जरिए देश के किसी भी कोने में महज 12 घंटे में पहुंचा जा सकता है।

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क्यों रहें बुलेट ट्रेन पर निर्भर?
इस सम्मेलन में रेल मंत्री ने कहा, कि ‘अधिक रफ्तार के लिए हम केवल बुलेट ट्रेन पर क्यों निर्भर रहें। परिवहन क्षेत्र में नई तकनीक की मदद से ट्रेनों को हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर चलाया जा सकता है। दुनिया भर के अनुसंधानकर्ताओं के साथ भारत में संयुक्त रूप से प्रौद्योगिकी का विकास किया जाएगा। नई ट्रेन-इंजन (रोलिंग स्टॉक) का निर्माण होगा।’

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रोड मैप पेश किया गया
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आह्वान किया कि अनुसंधान कर्ता भारतीय रेल के साथ मिलकर दुनिया की अत्याधुनिक रेल तकनीक को लेकर गंभीर हों। सम्मेलन में रेलवे में ‘चुंबकीय लेविटेशन तकनीक’ को अपनाने का रोड मैप भी पेश किया गया।

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स्पीड 500 किमी/प्रतिघंटा तक संभव
जानकारों की मानें तो इस तकनीक की मदद से ट्रेन को 500 किलोमीटर प्रतिघंटा पर चलाना संभव होगा। सम्मेलन में ‘हाइपरलूप कैप्सूल तकनीक’ पर भी चर्चा की गई। इस तकनीक में पाइपनुमा चारों ओर से ढकी हुई लाइन बिछाई जाएगी। इसमें मैगलेव, प्रोपल्शन और इवैकुएशन तकनीक की मदद से ट्रेन एक से दो हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर चलाई जा सकेगी।

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