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बुनकरों ने उठाई आवाज, कहा- विद्युत विभाग के अधिकारी कर रहे उत्‍पीड़न

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 25 Jun 2018 2:09 PM GMT

बुनकरों ने उठाई आवाज, कहा- विद्युत विभाग के अधिकारी कर रहे उत्‍पीड़न
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शामली: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पावरलूम बुनकरों को किसानों की तरह फ्लैट रेट बिजली के शासनादेश में सरकार द्वारा किए जा रहे बदलाव के विरोध में सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा बुनकरों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा। बुनकर समाज के लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं।

अधिकारी कर रहे मनमानी

बुनकर संघ अध्‍यक्ष सालिम अंसारी ने बताया कि जनपद शामली कलेक्ट्रेट में सोमवार को बुनकर समाज के सैंकडों लोगों ने अपनी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया तथा मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा। प्रदेश के पावरलूम बुनकरों के कल्याण के लिए किसानों की भांति पावरलूम बुनकरों को भी वित्तीय वर्ष 2006 से तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा सस्ते दर फ्लैट रेट बिजली दिए जाने का बजट में प्रावधान कर आदेश पारित किए गए थे। प्रदेश में किसानों के बाद सबसे अधिक लोग बुनकरों के कारोबार में लगे हुए हैं। और इसी रोजगार से अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। बुनकर समाज भारी भरकम बिजली बिल देने में असमर्थ है और इसी को देखते हुए पावरलूम बुनकरों के कल्याण हेतु सब्सीडी आधारित बुनकर फ्लैट रेट टैरिफ लागू की गयी है। जिसमें बुनकरों का 130 रुपये हार्स पावर प्रति माह तथा 10 प्रतिशत अतिरिक्त पंखा बत्ती का विद्युत विभाग में जमा कराना होता है। लेकिन यह व्यवस्था लागू होते ही पावरलूम फ्लैट रेट टैरिफ में विभागीय अधिकारियों द्वारा मनमाना हस्तक्षेप कर बुनकरों को परेशान व उत्पीडित किया जा रहा है। लोड बढाने व नया कनेक्शन देने में भी टाल मटोल की जाती है। बुनकरो का कहना है।कि हथरकघा विभाग द्वारा सरकार को यह प्रस्ताव भेजा जा रहा है कि बुनकर अपना विद्युत बिल सीधे विभाग के खाते में जमा करेगा और उसके बाद विद्युत विभाग हथकरघा विभाग को बुनकरों के बिल जमा होने की सूचना देगा तब कही जाकर हथकरधा विभाग बुनकरों के खाते में छूट(सब्सीडी) का पैसा भेजेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव बुनकर समाज को मंजूर नहीं है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2006 के शासनादेश को यथावत रखा जाए तथा इसमें कोई छेडछाड न की जाए। समाज के लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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