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अपना भारत/न्यूज़ट्रैक Exclusive: जख्मों पर मरहम नहीं लगा पाए शाह

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 4 Aug 2017 11:40 AM GMT

अपना भारत/न्यूज़ट्रैक Exclusive: जख्मों पर मरहम नहीं लगा पाए शाह
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विजय शंकर पंकज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन की नब्ज टटोलने आए भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह कार्यकर्ताओं की पीड़ा से रूबरू हुए परन्तु उनके जख्म पर मरहम नहीं लगा पाए। सरकार और संगठन से कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनने के बाद भी उनकी नाराजगी दूर करने का पार्टी प्रमुख से कोई आश्वासन नहीं मिला।

ऐसे में भाजपा अध्यक्ष का तीन दिवसीय लखनऊ प्रवास कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक ही रहा। शाह से योगी सरकार के कुछ मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के रवैये को भी लेकर शिकायतें की गयीं। इस पर शाह की ओर से कड़ी चेतावनी भी दी गयी। शाह के तेवर से साफ है कि अगस्त के तीसरे सप्ताह में ही उत्तर प्रदेश सरकार और संगठन में फेरबदल किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं के समक्ष विनम्र रहे शाह

अपने स्वभाव के विपरीत अमित शाह पहली बार लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के कार्यक्रम में एकदम विनम्र बने रहे। शाह ने धैर्यपूर्वक कार्यकर्ताओं की शिकायतों को दो घंटे तक सुना। बीच-बीच में कुछ कार्यकर्ताओं के आक्रोश एवं असंयमित शब्दों के चयन पर चेतावनी अवश्य दी, फिर भी उनकी बातें सुनीं।

हालांकि इस कार्यक्रम में चयनित कार्यकर्ताओ को ही बुलाया गया था। यहाँ तक कि पार्षदों को भी बैठक में नही बुलाया गया। संगठन की कमान संभालने वालों को अंदेशा था कि पार्षद संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकते है। पूरी सूची संगठन मंत्री सुनील बंसल की तिकड़ी ने बनायी थी जो उनकी पसंद के थे। अन्य कार्यकर्ताओं के प्रवेश को पूरी तरह से रोक दिया गया था।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि तीन दशकों से भी ज्यादा समय से संगठन के प्रति समर्पण एवं निष्ठा से रहते हुए भी आज सरकार या संगठन में उनकी कोई पूछ नहीं हो रही है। मंत्री सत्ता के दलालों के माध्यम से काम कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

दूसरों दलों से आए नेता सरकार में ज्यादा हावी हैं। सरकारी अधिवक्ताओं के चयन में सपा एवं बसपा के प्रभावी लोगों को तरजीह दी गयी। दो माह तक यह चर्चा होती रही कि सरकारी अधिवक्ताओं का चयन संगठन से भेजी गयी सूची के ही आधार पर होगा परन्तु जब परिणाम आया तो सब भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ था।

कार्यकर्ताओं के मुद्दे पर सरकार और संगठन में कोई तालमेल नही है। मंत्री कहते हैं कि संगठन से पैरवी पत्र लाएं और संगठन के पदाधिकारी कहते है कि यह सरकार और मंत्री का काम है, संगठन के पदाधिकारी सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नही करेंगे। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि केन्द्र से लेकर राज्य तक तमाम सरकारी पद खाली हैं परन्तु भाजपा कार्यकर्ताओं का समायोजन नहीं हो रहा है। शाह ने संगठन की कमियों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए महामंत्री संगठन सुनील बंसल को पहल करने का निर्देश दिया।

जिलों में गुटबाजी की शिकायत

संगठन को लेकर कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश भाजपा कुछ लोगों की जेबी होकर रह गयी है। प्रदेश भाजपा का पूर्णकालिक अध्यक्ष न होने से भी कार्य प्रभावित हो रहा है। दूसरे दलों से आए नेता अपने लोगों को सरकार और संगठन के कामकाज में तरजीह दे रहे हैं। इसका परिणाम है कि जिलों में कई गुट बनते जा रहे हैं।

थानों और तहसीलों पर भी कार्यकर्ताओं की यह गुटबाजी दिख रही है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का असर है कि सितंबर तक पार्टी के निर्धारित कार्यक्रम विफल होने लगे हैं। संगठन पदाधिकारियों के बुलाए जाने पर आक्रोशित कार्यकर्ता अब आने से कतरा रहा है। यही स्थिति रही तो २0१९ के लोकसभा चुनाव में बूथ स्तर की तैयारिया निष्फल हो सकती हैं।

सरकार की आलोचना पर कार्यकर्ताओं का कहना था कि मौरंग-बालू का खनन रोकने से पूरे प्रदेश में त्राहि-त्राहि मची हुई है। कामकाज ठप है और मजदूर बेरोजगार हैं जिससे पार्टी को आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। कई कार्यकर्ताओं ने लोक निर्माण, नगर विकास, आवास, बिजली, स्वास्थ्य, सिंचाई, वन एवं प्रदूषण, ग्राम विकास, पंचायती राज, शिक्षा एवं बाल पुष्टाहार आदि विभागों में भ्रष्टाचार की चर्चाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। सरकार की शिकायतों पर अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ इशारा किया।

शाह ने मंत्रियों के पेच कसे

कार्यकर्ताओं की पीड़ा एवं नाराजगी सुनने के बाद मंत्रियों एवं पदाधिकारियों की बैठक में अमित शाह का संयम जवाब दे गया और इसकी भड़ास उन्होंने कुछ मंत्रियों पर निकाली। शाह ने कहा कि संगठन की पैरवी के नाम पर मंत्री कार्यकर्ताओं के यथोचित कामों को न लौटाएं। कार्यकर्ताओं का काम किस प्रकार होगा, इसका रास्ता निकालना मंत्री का काम है। इसके लिए किसी संगठन पदाधिकारी की पैरवी की जरूरत नहीं है।

उन्होंने मंत्रियों को कुछ समय निर्धारित कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की सलाह दी। मंत्रियों ने कहा कि ज्यादातर कार्यकर्ता अधिकारियों के तबादले अथवा ठेके-पट्टे की पैरवी का काम लेकर आते हैं। इस पर शाह ने कहा कि जो काम नियमानुसार हो उसे कर दें अन्यथा साफ तौर पर बता दें कि यह काम संभव नही है।

शाह के आगमन पर विपक्ष में सेंध

अमित शाह के लखनऊ आगमन पर उनके स्वागत के लिए अन्दरखाने जो शतरंजी चाल चली गयी थी उसका मकसद विपक्ष में सेंध लगाना था। मुख्यमंत्री सहित पांच मंत्री ऐसे हैं जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसमें से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से तथा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कौशाम्बी से सांसद हैं। उपराष्ट्रपति के पांच अगस्त को होने वाले चुनाव के बाद इन दोनों का संसद से इस्तीफा तय है।

इसके साथ ही गोरखपुर एवं कौशाम्बी के एक-एक विधायक भी विधानसभा से इस्तीफा देकर इनके चुनाव लडऩे का मार्ग प्रशस्त करेंगे। संभावना है कि योगी आदित्यनाथ गोरखपुर (देहात) तथा केशव मौर्य सिराथू विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। शेष तीन मंत्रियों उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, स्वतंत्रदेव सिंह तथा मोहसिन रजा को 19 सितम्बर तक विधानपरिषद पहुंचाने के लिए भाजपा के रणनीतिकारों ने समाजवादी पार्टी के दो यशवन्त सिंह तथा बुक्कल नवाब और बसपा के ठाकुर जयवीर सिंह से इस्तीफा दिलाकर रास्ता साफ कर दिया। शाह के लखनऊ से दिल्ली जाने के कुछ घंटे बाद ही इन तीनों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।

भ्रष्टाचारियों को भा रही भाजपाई गंगा

सपा और बसपा छोडक़र भाजपा की शरण लेने वाले नेताओं पर कई तरह के भ्रष्टाचार एवं अन्य आरोप लगते रहे हैं। इस समय यह राजनीतिक चर्चा गरम है कि विपक्षी दलों के भ्रष्टाचारियों तथा अपराधियों को भाजपा की गंगा भाने लगी है। भाजपा के साथ आते ही इन विपक्षी दलों के सभी पाप धुल जा रहे हैं। बसपा से भाजपा की शरण में आने वाले ठाकुर जयवीर सिंह पश्चिमी यूपी एवं नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के बड़़े भूमाफिया एवं बिल्डर माने जाते हैं। नोएडा के जिस यादव सिंह प्रकरण की सीबीआई जांच चल रही है, उसमें जयवीर की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

अपने भूमि एवं बिल्डर कारोबार को बचाने के लिए जयवीर का भाजपा में आना मजबूरी थी। इसी प्रकार सपा छोड़ भाजपा में आने वाले बुक्कल नवाब पर भी फर्जी कागजातों के माध्यम एलडीए से करोड़ों रुपये मुआवजे हासिल करने के आरोप हैं। गोमती रिवरफ्रंट के भूमि मुआवजे में भी बुक्कल नवाब का नाम है जिसकी योगी सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

सपा छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले यशवन्त सिंह पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप तो नहीं है किन्तु उनकी क्षत्रिय राजनीति के कारण सपा में विवाद था और वह असहज महसूस कर रहे थे। वैसे चर्चा है कि यशवन्त के भी भाजपा के एक नेता के साथ आॢथक तंत्र जुड़े हुए हैं।

विपक्ष में बड़ी टूट का खाका तैयार

भाजपा में चर्चा है कि अमित शाह ने यूपी के विपक्षी दलों में भारी तोडफ़ोड़ का खाका तैयार कर लिया गया है। इसके लिए चार सदस्यों की एक टीम उच्चस्तर पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार सपा के डेढ़ दर्जन, बसपा के 5 से 6, कांग्रेस के 3 और 3 निर्दल विधायक भाजपा में आने के लिए लाइन में लगे है। इन विधायकों से भाजपा नेताओं की लगातार वार्ता चल रही है।

छावनी बना रहा भाजपा कार्यालय

अमित शाह के लखनऊ आने से एक दिन पूर्व ही भाजपा के प्रदेश कार्यालय को छावनी बना दिया गया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की रणनीति के तहत विश्वसनीय कार्यकर्ताओं को छोड़ अन्य किसी को भी भाजपा कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी। यहाँ तक कि भाजपा विधायकों से लेकर मीडिया से जुड़े लोगों को भी दो दिन कार्यालय से बाहर रखा गया। शाह के आने से पहले सुनील बंसल ने मीडिया प्रवक्ताओं को बुलाकर खरी-खोटी सुनायी। बंसल का कहना था कि भाजपा की इतनी बड़ी मीडिया की टीम होते हुए भी पार्टी के खिलाफ नकरात्मक खबरें छप रही हैं।

बंसल ने मीडिया से जुड़े लोगों को इस बात से सावधान रहने की हिदायत दी कि भाजपा विरोधी पत्रकारों से अन्दरूनी बातें करने से परहेज रखें और जिसके भी ऐसे लोगों से संबंध की बात उजागर होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शाह के दौरे के तीसरे दिन प्रेस कांफ्रेंस के लिए ही मीडिया को प्रवेश की अनुमति मिली।

दौरे के दौरान राजनाथ सिंह की अनदेखी

शाह के तीन दिवसीय प्रवास के सभी कार्यक्रमों में केन्द्रीय गृहमंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह को उपेक्षित रखा गया। सरकार और संगठन के किसी भी कार्यक्रम में उनका नाम तक नहीं लिया गया। किसी पोस्टर-बैनर में उनकी फोटो नहीं दिखी। राजनाथ के लोगों को भी संगठन के कामों से दूर रखा गया।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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