×

विधानसभा चुनाव परिणाम: भाजपा की एक और अड़चन दूर, आडवाणी का राष्ट्रपति बनना तय

8 मार्च को सोमनाथ में एक मीटिंग में चर्चा हुई थी, जिसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत खुद आडवाणी भी मौजूद थे। मोदी ने मीटिंग में यह संकेत दिया था कि उनकी तरफ से यह आडवाणी को गुरुदक्षिणा होगी। नतीजों के बाद अब आडवाणी का नाम फाइनल माना जा रहा है।

zafar

zafarBy zafar

Published on 14 March 2017 1:22 PM GMT

विधानसभा चुनाव परिणाम: भाजपा की एक और अड़चन दूर, आडवाणी का राष्ट्रपति बनना तय
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • koo

संजय तिवारी

लखनऊ: उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के साथ ही देश के चार राज्यों में सरकार बनाने जा रही भाजपा को अपनी पसंद के राष्ट्रपति बनाने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। साथ ही पार्टी ने इस पद के लिए लालकृष्ण आडवाणी का नाम भी लगभग तय कर दिया है।

मोदी की गुरु दक्षिणा

इस बारे में चुनाव नतीजे आने से पहले 8 मार्च को सोमनाथ में एक मीटिंग में चर्चा हुई थी, जिसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत खुद आडवाणी भी मौजूद थे। मोदी ने मीटिंग में यह संकेत दिया था कि उनकी तरफ से यह आडवाणी को गुरुदक्षिणा होगी। नतीजों के बाद अब आडवाणी का नाम फाइनल माना जा रहा है।

पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि सोमनाथ में हुई उस खास बैठक में मोदी, शाह, आडवाणी के अलावा केशुभाई पटेल भी मौजूद थे। उसी दौरान मोदी ने यह संकेत दिया था कि अगर उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे बीजेपी के मनमुताबिक हुए, तो वे अपने गुरु आडवाणी को राष्ट्रपति पद पर देखना चाहेंगे।

गुरु शिष्य संबंध

इसी साल जुलाई में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। आडवाणी और मोदी की सोमनाथ में हुई मुलाकात कई मायनों में अहम है। 1990 में आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा शुरू की थी, तब उन्होंने अपने सारथी के रूप में मोदी को प्रोजेक्ट किया था। यहीं से मोदी की नेशनल पॉलिटिक्स में एंट्री हुई थी।

मोदी को गुजरात का सीएम बनवाने में भी आडवाणी का अहम रोल था। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर मोदी से जब अटल बिहारी वाजपेयी नाराज हुए थे, तो उस वक्त भी आडवाणी ने मोदी का बचाव किया था।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त जब मोदी को पीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया गया, तब आडवाणी ने ही विरोध शुरू किया था। इसके बाद भी मोदी पीएम बन गए। तभी से आडवाणी ने मौन साध लिया। माना गया कि दोनों के बीच उसी के बाद से एक अनडिक्लेयर्ड कोल्ड वार शुरू हो गई। लेकिन यूपी समेत 5 राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद आडवाणी ने सुलह की पॉलिसी को अपना लिया।

समय का फेर

ध्यान देने की बात तो यह है की जब 1990 में आडवाणी ने सोमनाथ की रथयात्रा शुरू की थी, तब मोदी 3 दिन पहले ही सोमनाथ पहुंच गए थे। उस वक्त वे आडवाणी के सारथी के रोल में थे। पर अब वक्त बदल गया है। लेकिन इस बार जब 8 मार्च को नरेंद्र मोदी सोमनाथ पहुंचे, उससे पहले ही 7 मार्च को आडवाणी सोमनाथ पहुंच चुके थे। अब यह तो समय समय का फेर है।

इस बीच यह भी खबर है कि राम मंदिर आंदोलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आना है जिसमे अडवाणी के आलावा डॉ मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह का भी नाम है। यदि कोई अदालती अड़चन आती है तब आडवाणी के मामले में पार्टी क्या रुख अख्तियार करेगी, यह देखने लायक होगा।

फिलहाल ,परिदृश्य तो यही है कि पार्टी के शीर्ष पुरुष को प्रधानमंत्री पूरे सम्मान के साथ स्थापित करने का मन बना चुके हैं।

(फोटो साभार:यूट्यूब)

zafar

zafar

Next Story