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मोदी के नाम और योगी के काम से फतेह होगा 2019, इन दो दिनों में बनेगा ब्लूप्रिंट

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RishiBy Rishi

Published on 1 May 2017 7:51 AM GMT

मोदी के नाम और योगी के काम से फतेह होगा 2019, इन दो दिनों में बनेगा ब्लूप्रिंट
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लखनऊ: इस बार दिल्ली के तख्त का रास्ता सचमुच ही लखनऊ से होकर जा रहा है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा में अविश्वनीय प्रदर्शन और विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत की सरकार के बाद अब यूपी बीजेपी मोदी जी को रिटर्न गिफ्ट देनी की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी बीजेपी के सरकार और पार्टी अब 2019 के लिए ब्लूप्रिंट बनाने में जुट गई है। यही वजह है कि लखनऊ में 1 मई से दो दिन के लिए भाजपा का थिंक टैंक प्रदेश कार्यसमिति के जरिए मंथन करेगा।

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दो दिन की कार्यसमिति में क्या है खास

लखनऊ के साइंटिफिक कनवेंशन सेंटर में इस कार्यसमिति की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 मई को शाम 4 बजे करेंगे। इससे पहले पदाधिकारियों की एक बैठक है, जिसमें मीडिया के जाने की अनुमति नहीं है। इसके बाद योगी का उद्बोधन का होगा। जिसमें योगी आदित्यनाथ इस कार्यसमिति में जनता और पार्टी को धन्यवाद देंगे। इस कार्यसमिति में राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव पेश होंगे। कार्यसमिति का समापन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह करेंगे।

राजनीतिक महत्व क्या है

दरअसल उत्तर प्रदेश में 73 सीटों की जीत ही योगी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 71 और उसकी सहयोगी अपना दल ने 2 सीटें जीती थी। सपा और कांग्रेस सिर्फ परिवार तक सिमट तक रह गई थी। बसपा का सफर सिफर तक सिमट गया है। ऐसे मे यह प्रदर्शन दोहराना सबसे बड़ी चुनौती है।

साथ ही अब पार्टी ने 2019 के लिए मिशन 400 प्लस रख दिया है, जिसमें हारी सीटों को भी जीतना है। यानी प्रदर्शन को दोहराना नहीं बेहतर करना है। वहीं इस बार सरकार भाजपा की ही है ऐसे में जनता कोई भी मुरव्वत नहीं करेगी और जवाब सही नहीं मिला तो जनता मुंह मोड़ने में देर नहीं करती। 1977 और 1980 इसके गवाह हैं। यानी उम्मीद का पहाड़ ही सियासी दौड़ का सबसे बडा रोड़ा है, जिसे पार पाने की कवायद में यूपी के दिग्गज जुटेंगे।

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बदला-बदला है विपक्ष

समाजवादी पार्टी विपक्ष में हमेशा शानदार प्रदर्शन करती है पर अच्छी बात यह है कि इस समय भी कुनबा बिखरा और पार्टी बंटी दिख रही है। अखिलेश यादव में नेताजी का पद ले लिया पर कद हासिल करने में समय लगेगा। पर राजनैतिक अस्तित्व का संकट बड़े बडे मतभेद भुला देता है तो यह तो महज कुनबे का सवाल है। वहीं बसपा चोट खाकर खतरनाक हो चुकी है। ऐसे में दलित मुस्लिम गठजोड़ की बड़ी कोशिश कर रही है। यूपी की हार के बाद पूरे देश में एंटी बीजेपी एक्सिस पर अब सारे दल एक होने की सोच रहे है। यानी मुकाबला कड़ा होगा।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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