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यूपी में सपा-बसपा के घर में भाजपा की सेंधमारी, मंत्रियों का रास्ता साफ

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RishiBy Rishi

Published on 29 July 2017 2:06 PM GMT

यूपी में सपा-बसपा के घर में भाजपा की सेंधमारी, मंत्रियों का रास्ता साफ
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विजय शंकर पंकज

लखनऊ। देशभर में विपक्ष में तोड़फोड़ की नीति अपनाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में कमजोर विपक्ष में भी सेंधमारी शुरू कर दी है। पिछले डेढ माह से विपक्षी विधायकों में सेंधमारी की रणनीति अपना रही भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन के दिन चार विधान परिषद सदस्यों (सपा के तीन तथा बसपा के एक ) सदस्य को सदन की सदस्यता से इस्तीफा दिलाकर अपने मंत्रियों को विधान परिषद का सदस्य बनाने का रास्ता साफ कर लिया।

ऐसे में योगी सरकार के मंत्रियों के मंत्रिमंडल से बाहर होने अथवा किसी सदन का सदस्य होने की चल रही अफवाहों को एक ही झटके में समाप्त कर दिया।

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शनिवार की सुबह ही अचानक विधान परिषद के चार सदस्यों ने अपनी सदस्यता तथा पार्टी की सदस्यता से इस्तीफे की घोषणा कर दी। यह स्थिति तब हुई जबकि शुक्रवार को ही विधान परिषद का सत्र समाप्त हुआ और किसी को भी इसकी भनक तक नही लगी। इस्तीफा देने वालों में सपा के तीनों ही सदस्य सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अत्यंत विश्वसनीय एवं नजदीकी माने जाते थे। इसमें मधुकर जेटली अखिलेश सरकार में राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त थे।

मधुकर जेटली के इस्तीफे के पीछे उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को विधान परिषद का सदस्य बनाये जाने की सौदेबाजी है। वैसे भी मधुकर जेटली का पूरा राजनीतिक कार्यक्रम सत्ता के ईदगिर्द लोगों को खुश कर पद हासिल करने का रहा है। कांग्रेस के मो. आरिफ खां से लेकर भाजपा के कल्याण सिंह, बसपा तथा सपा से नजदीकी संबंध बनाने में सफल रहने वाले जेटली एक बार फिर से सत्ता की सियासत को पकड़ने में सफल रहे। दिनेश शर्मा को विधान परिषद तक पहुंचाने की भूमिका के तहत मधुकर ने भाजपा से लंबा सौदा किया है।

वैसे अखिलेश सरकार में लखनऊ मैट्रो में सौदेबाजी के कारण उन्हें पद से हाथ धोना पड़ा था। इसी प्रकार यशवंत सिंह के इस्तीफे के पीछे स्वतंत्रदेव सिंह के लिए सीट खाली करने का प्रस्ताव है। भाजपा पदाधिकारी के साथ ही विधान परिषद का सदस्य रहते यशवंत सिंह से उनके घनिष्ठ संबंध बताये जाते थे। चर्चा तो यह भी रही कि स्वतंत्रदेव तथा यशवंत सिंह ने एक दूसरे के आर्थिक हितों का भी बराबर ख्याल रखा।

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सपा में यशवंत सिंह वैसे भी अमर सिंह खेमे के माने जाते थे। अमर सिंह के बाद यशवंत वैसे भी सपा में किनारे पड़े हुए थे। अब भाजपा में योगी तथा स्वतंत्रदेव के माध्यम से वह अपनी राजनीति बुनियाद को और मजबूत कर लेगे। बुक्कल नवाब लखनऊ के तमाम जमीन घोटाले तथा मुआवजे में फंसे हुए हैं।

ऐेसे में राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने बुक्कल नवाब को सत्ता का कवच दिलाने का आश्वासन दिया है। बसपा के जयवीर सिंह पर भी नोएडा में भारी जमीन घोटाले का आरोप है। जयवीर का नाम यादव प्रकरण में भी रहा है। इस प्रकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने वाली भाजपा ने विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति के तहत उन्ही सब पुराने भ्रष्टाचारियों को गले लगाना शुरू कर दिया है।

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विधान परिषद के इन सदस्यों के इस्तीफे को लेकर पिछले डेढ माह से रणनीति चल रही थी। भाजपा नेतृत्व ने अपने सभी सदस्यों को साफ निर्देश दे दिया था कि वे अपने को सदन का सदस्य बनने के लिए अपना रास्ता स्वयं खोजे, पार्टी अपनी तरफ से सहयोग करेगी।

इसी रणनीति के तहत स्वतंत्रदेव ने यशवंत सिंह, दिनेश शर्मा ने मधुकर जेटली तथा मोहसिन रजा ने बुक्कल नवाव से अपने लिए विधान परिषद की सीटें खाली कराने का रास्ता साफ कराया। बसपा के जयवीर सिंह के लिए उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या की पहल कही जा रही है। वैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधान सभा का चुनाव लडकर ही सदन का सदस्य बनेंगे।

अमित ने सुना कार्यकर्ताओं का आक्रोश

लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कार्यकर्ताओं के आक्रोश का पहली बार आमना-सामना हुआ। अपने स्वभाव के विपरीत अमित शाह ने दो घंटे तक कार्यकर्ताओं की बात सुनी परंतु साथ ही में कुछ उग्र व्यवहार को देखते हुए उन्हें कहना पड़ा कि कार्यकर्ता पार्टी अनुशासन के साथ संयमित भाषा का उपयोग करे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि सरकार की आलोचना से कार्यकर्ताओं का हित साधन नही होगा।

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कार्यकर्ताओं ने भाजपा अध्यक्ष से साफ तौर पर कहा कि सरकार में उनकी कोई सुनवाई नही होती। मंत्री सत्ता के दलालों के माध्यम से काम कर रहे है जबकि कार्यकर्ताओं के आवेदन फाड दिए जाते हैं। दूसरे दलों से आये नेताओं को पार्टी में ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और इससे जिलों-जिलों में नये गुट बनते जा रहे हैं।

पार्टी में गुटबाजी प्रभावी होती जा रही है। संगठन निष्क्रिय है और नेता गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे है। कार्यकर्ताओं ने मौरंग, बालु के खनन से हो रही परेशानियों का खुलकर जिक्र किया। उनका कहना था कि सरकार की इस नीति से पूरे प्रदेश में पार्टी के खिलाफ माहौल बन रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं ने लोक निर्माण, सिंचाई, ग्राम्य विकास, वन, प्रदुषण, पंचायती राज, शिक्षा, बाल पुष्टाहार आदि विभागों में चल रही भ्रष्टाचार के मामलों का उल्लेख किया।

टीसीएस को लखनऊ में रोकने की कवायद

भाजपा लखनऊ के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह ने टीसीएस के लखनऊ छोडने का मामला उठाते हुए कहा कि इससे लखनऊ के युवकों के समक्ष बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वैसे भी लखनऊ में कम उद्योग है और एक चल रहा था तो वह वापस जा रहा है।

अमित शाह ने इस मसले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ इशारा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस संदर्भ में 21 को टीसीएस के अधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया है। टीसीएस को प्रदेश से बाहर नही जाने दिया जाएगा। इस पर लखनऊ के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया कि यूपी नही लखनऊ में टीसीएस चाहिए। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि टीसीएस लखनऊ में ही रहेगा।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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