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पूर्वांचल की राजनीति में महेंद्र नाथ पांडेय की अलग पहचान

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tiwarishaliniBy tiwarishalini

Published on 8 Sep 2017 10:56 AM GMT

पूर्वांचल की राजनीति में महेंद्र नाथ पांडेय की अलग पहचान
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आशुतोष सिंह की स्पेशल रिपोर्ट

वाराणसी: संघर्षों के सहारे सियासत की सीढिय़ा चढऩे वाले महेंद्र नाथ पांडेय को जब यूपी बीजेपी की कमान सौंपी गई तो किसी को हैरानी नहीं हुई। लंबा राजनीतिक अनुभव, लेकिन लो प्रोफाइल जिंदगी। पूर्वांचल की राजनीति में महेंद्र नाथ पांडेय की यही पहचान है। वे चाहे केंद्र में मंत्री रहे हों या फिर राज्य में, सादगी और शालीनता को हमेशा अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाए रखा।

छात्र जीवन से सीखा सियासत का ककहरा

गाजीपुर (सैदपुर) के पखनपुर गांव के मूल निवासी महेंद्र नाथ पांडेय पूर्वांचल के उन चंद नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने छात्र जीवन से राजनीति का ककहरा सीखा। उनकी जिंदगी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा का प्रभाव देखने को मिलता है। 1973 में उन्होंने सीएम एग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद से उनका सियासी कॅरियर बढऩे लगा।

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1978 में वे बीएचयू छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। इस दौरान उन्होंने बीएचयू से हिन्दी में पीएचडी करने के साथ ही पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री ली। बीएचयू में पांडेय के साथी रहे सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि वह शुरू से ही जुझारू किस्म के थे। जिस बात को ठान लेते उसे पूरा करके ही मानते थे। जिस दौर में कांग्रेस का बोलबाला था, उस दौर में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन किया और काबलियत के दम पर एक अलग जगह बनाई।

कई चुनावों में मिली हार

अस्सी का दशक आते-आते महेंद्र नाथ पांडेय की गिनती बीजेपी के तेज-तर्रार युवा नेताओं में होने लगी। उनकी प्रतिभा और जुझारूपन को देखते हुए 1980 में उन्हें पहली बार सैदपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया,लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1984 में उन्होंने इसी सीट से फिर किस्मत आजमाई, लेकिन इस बार भी उनकी हार हुई। 1991 में रामलहर में उनका खाता खुला और वे पहली बार विधायक चुने गए। 1996 में दोबारा विधायक चुने गए तो उन्हें कल्याण सिंह सरकार में पंचायती राज और नियोजन मंत्री बनाया गया। हालांकि इसके बाद उनके सितारे गॢदश में चले गए। 2002 और 2007 में विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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2009 के चुनाव में उन्होंने भदोही सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। यहंा भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें चंदौली से कामयाबी मिली। सिर्फ सियासत ही नहीं जनांदोलनों से भी उनका गहरा नाता रहा है। आपातकाल के दौरान पांच महीने जेल की हवा खाई तो राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान मुलायम सरकार ने उन्हें रासुका के तहत निरुद्ध कर दिया।

कलराज मिश्रा को मानते हैं राजनीतिक गुरू

पांडेय के राजनीतिक कॅरियर को बनाने में बीजेपी के कद्दावर नेता कलराज मिश्रा का अहम रोल रहा है। कलराज मिश्रा ने ही उन्हें बीजेपी में मौका दिया। उनके ही संरक्षण में पांडेय ने राजनीति का ककहरा सीखा। आज भी वे कलराज मिश्रा को अपना राजनीतिक गुरू मानते हैं। कलराज मिश्रा और पांडेय का गांव आसपास है। इस लिहाज से भी दोनों करीब रहे हैं। दोनों जिस क्षेत्र से आते हैं वहंा हमेशा समाजवादी पार्टी का दबदबा रहा।

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मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलवाया

चंदौली से लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद सदन में उन्होंने जबर्दस्त उपस्थिति दर्ज कराई। क्षेत्र की आधारभूत समस्याओं को मजबूती से रखने के साथ ही रिंगरोड में आ रही बाधाओं को भी दूर कराया। मुगलसराय स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस नामकरण की सोच उनके दिमाग में लंबे समय से थी। बीजेपी की सरकार बनते ही उन्होंने अपनी इच्छा संसद में जाहिर की थी।

योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री

हमारे नए अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय की सरलता, उनकी समन्वयवादी भावना, सांगठनिक क्षमता का कोई विकल्प नहीं। वह जितने अच्छे संगठनकर्ता हैं उतने ही अच्छे रणनीतिकार भी हैं। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इनके नेतृत्व में भाजपा की प्रदेश इकाई बहुत अच्छा काम करेगी। डॉ पाण्डेय को सरकार और संगठन दोनों में काम करने का बहुत अच्छा अनुभव है। कार्यकर्ताओं की क्षमता से वह भलीभांति परिचित हैं। किससे क्या काम लेना है, यह उन्हें ठीक से पता है। मैं उन्हें सरकार की तरफ से बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का बहुत बहुत आभार कि उन्होंने प्रदेश संगठन का नेतृत्व बहुत ही अच्छे नेता को सौंपा है।

-केशव प्रसाद मौर्य, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री

हमारी पार्टी में संगठन का सर्वाधिक महत्व है। सरकार इसीलिए है कि संगठन मजबूत है। सरकार संगठन से बड़ी नहीं हो सकती। हमारे कार्यकर्ता बहुत ही मेहनती और संकल्पबद्ध हैं। हमारे नए अध्यक्ष के लिए यह एक सुअवसर है। पिछले चुनाव में तो 80 में 73 सीटें आई हैं लेकिन 2019 में सभी 80 सीटों पर भाजपा का परचम लहराएगा। अभी तो 42 प्रतिशत वोट मिले हैं, इस बार 60 प्रतिशत वोट मिलेंगे। यह सब कर्मठ कार्यकर्ताओं के सहयोग से हमारे नए अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय कर दिखाएंगे।

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Excellent communication and writing skills on various topics. Presently working as Sub-editor at newstrack.com. Ability to work in team and as well as individual.

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