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MP: कांग्रेस की सरकार बनते ही दिग्गज नेताओं के निशाने पर आये सिंधिया, जाने क्यों!

मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनते ही चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया दिग्गज नेताओं की राजनीति के निशाने पर आ गये हैं।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 16 Dec 2018 8:09 AM GMT

MP: कांग्रेस की सरकार बनते ही दिग्गज नेताओं के निशाने पर आये सिंधिया, जाने क्यों!
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भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनते ही चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया दिग्गज नेताओं की राजनीति के निशाने पर आ गये हैं। इसकी शुरुआत उसी समय हो गई थी जब उनके समर्थकों की मांग को नजरअंदाज करते हुए उन्हें सीएम नहीं बनने दिया गया था।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब कांग्रेस पार्टी के कई बड़े कद्दवार नेता प्रदेश की राजनीति से सिंधिया को दूर रखने की रणनीति पर अभी से काम करने लगे है।

इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए शुरू हुई रस्साकशी के बीच अजय सिंह का नाम आगे बढ़ाया गया है, जिससे कि सिंधिया को रोका जा सके। वहीं खबर ये भी आ रही है कि ये तो सिर्फ दिखावा है, समय आने पर दिग्विजय को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है।

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मप्र कांग्रेस में कई दशकों से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सिंधिया परिवार के रिश्तों में दूरियां हैं। स्व. माधवराव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक ये दूरियां मौके-बे-मौके दिखाई देती रही हैं। विधानसभा चुनाव 2018 के लिए जब प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ था, तब कमलनाथ के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी चला।

उस समय दिग्गज नेताओं ने अनुभव को आधार बताकर सिंधिया को दौड़ से बाहर कर दिया और प्रदेश में सरकार बनाने की प्राथमिकता बताते हुए सिंधिया को हाईकमान के फैसले में साथ करा लिया। फिर विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हुईं और समन्वय समिति बनी तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उसके अध्यक्ष बने।

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उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा कर नाराज और घर बैठे नेताओं को मानने का काम किया, लेकिन सिंधिया के प्रभाव वाले आठ जिलों में एक दिन भी नहीं पहुंचे। जबकि सिंधिया ने पूरे प्रदेश के अंचलों में दौरे किए। चुनाव परिणामों के एलान के बाद जब कांग्रेस की सरकार बनते दिखाई दी तो फिर ये दिग्गज विधायक दल के नेता चयन में भोपाल से दिल्ली तक एक दिखाई दिए।

भोपाल में दिग्विजय सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी और निवृत्तमान नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के निवास पर रणनीति बनाई। विधायक दल में पारित हाईकमान पर फैसला छोड़ने के प्रस्ताव के बाद भी दो दिन तक नेताओं के दबाव चले। गांधी परिवार को सिंधिया को मनाने के लिए उतारा गया।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मप्र का फैसला लेने के लिए सोनिया और प्रियंका वाड्रा की मदद लेना पड़ी। बिना कोई फार्मूले के कमलनाथ को विधायक दल का नेता चुनने का फैसला सुना दिया।

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Aditya Mishra

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