पायलट खेमे का गहलोत पर हमला, गार्डन में नहीं विधानसभा में बहुमत साबित करें CM

विधायकों की बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विक्ट्री साइन बनाने के बाद सचिन पायलट के करीबियों ने गललोत पर बड़ा हमला बोला है…

अंशुमान तिवारी

जयपुर: विधायकों की बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विक्ट्री साइन बनाने के बाद सचिन पायलट के करीबियों ने गललोत पर बड़ा हमला बोला है। पायलट के करीबियों का कहना है कि विक्ट्री साइन बना लेने से बहुमब नहीं मिल जाता। सही बात तो यह है कि गहलोत सरकार अल्पमत में है और अगर गहलोत के पास बहुमत है तो उन्हें विधानसभा में इसे साबित करना चाहिए। विधानसभा में बहुमत साबित करने की जगह वे अपने विधायकों को होटल में क्यों भेज रहे हैं।

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सीएम के विक्ट्री साइन बनाने पर कसा तंज

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर सोमवार को सुबह हुई बैठक में 102 विधायकों के पहुंचने का दावा किया गया है। बैठक के दौरान कांग्रेस पर्यवेक्षकों के साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केसी वेणुगोपाल भी विक्ट्री साइन बनाते हुए दिखे थे। सूत्रों का कहना है कि 107 में से 18 विधायक बैठक में नहीं पहुंचे जो पायलट खाने के बताए जा रहे हैं। पायलट के करीबियों ने मुख्यमंत्री के विक्ट्री साइन बनाने पर तंज कसते हुए कहा कि बहुमत का फैसला मुख्यमंत्री के गार्डन में नहीं होता। बहुमत का फैसला विधानसभा के भीतर होता है और यदि गहलोत के पास बहुमत है तो उन्हें फ्लोर पर अपना बहुमत साबित करना चाहिए।

 

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व्हिप के बावजूद नहीं पहुंचे 18 विधायक

पार्टी की ओर से रविवार की रात व्हिप जारी किया गया था। यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि कोई विधायक बिना उपयुक्त कारण के बैठक में नहीं आएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस चेतावनी के बावजूद 18 विधायक बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे। यह विधायक पायलट खेमे से जुड़े हुए बताया जा रहे हैं। वैसे रविवार की शाम सचिन पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और गहलोत सरकार को अल्पमत में बताया था। दूसरी ओर राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी और मौजूदा संकट के समाधान के लिए पर्यवेक्षक बनाए गए अविनाश पांडे का दावा है कि हमारे पास 109 विधायकों का समर्थन पत्र है और गहलोत सरकार को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

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तीन विधायकों की मौजूदगी ने चौंकाया

इस पूरे विवाद के बीच तीन कांग्रेसी विधायकों दानिश अबरार, चेतन डूडी और रोहित बोहरा की मुख्यमंत्री आवास पर मौजूदगी ने सबको चौंकाया। इसका कारण यह था कि ये तीनों विधायक पायलट खेमे से जुड़े हुए बताए जाते हैं मगर वे मुख्यमंत्री के आवास पर हुई विधायक दल की बैठक में मौजूद थे। बाद में पत्रकारों से बातचीत में इन विधायकों का कहना था कि वे निजी कारणों से दिल्ली गए थे। उनका कहना था कि मीडिया में हमारे दिल्ली जाने का जो भी कारण बताया जाए, यह उनकी समस्या है मगर हम किसी भी विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते। तीनों विधायकों ने खुद को कांग्रेस का सिपाही बताते हुए आखिरी दम तक कांग्रेस का साथ देने का एलान किया।

भाजपा के लिए बहुमत जुटाना कठिन

यदि राजस्थान विधानसभा की दलीय स्थिति को देखा जाए तो मौजूदा समय में कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं। गहलोत सरकार को 13 में से 10 निर्दलीय और राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक का भी समर्थन हासिल है। इस तरह गहलोत अभी तक 118 विधायकों के समर्थन से सरकार चला रहे थे। दूसरी ओर भाजपा बहुमत के आंकड़े से अभी काफी दूर है और उसके पास विधानसभा में 72 विधायक हैं। बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए उसे अभी भी कम से कम 29 विधायकों की जरूरत है। पायलट के 30 विधायकों के समर्थन के दावे के बावजूद अभी तक इतना बड़ा संख्या बल उनके पास नहीं दिख रहा है। ऐसी स्थिति में गहलोत पायलट खेमे पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

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विधायकों को सता रहा इस बात का डर

पायलट खेमे के साथ जाने में कुछ विधायकों को इस बात का भी डर लग रहा है कि उन्हें दोबारा चुनाव लड़ना पड़ सकता है। विधायक दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति से बचना चाहते हैं। ऐसे में अभी भी दोनों खेमों के बीच शह और मात का खेल चल रहा है और गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों को संकट के समाधान तक जयपुर-दिल्ली मार्ग पर स्थित एक होटल में टिका दिया है।

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