Top

इ तो धोखा है ! महिला उम्मीदवारों को घर बैठा बेटा जी और पतिदेव निपटा रहे चुनाव

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 19 Nov 2017 10:54 AM GMT

इ तो धोखा है ! महिला उम्मीदवारों को घर बैठा बेटा जी और पतिदेव निपटा रहे चुनाव
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

शाहजहांपुर : चुनावों में सीटों पर महिला आरक्षण इसलिए आरंभ किया गया था, ताकि महिलाओं को राजनीति में भागीदारी मिले और चुनी हुई जनप्रतिनिधि आधी आबादी की आवाज को बुलंद कर सके। लेकिन, यहां भी इसे पुरूषों की नजर लग गई।

जो भी महिलाएं चुनावी समर में उतरती हैं, वो उम्मीदवारी तो अपनी करती हैं लेकिन पति, पिता, ससुर, बेटे या फिर किसी अन्य पुरुष की विरासत को ढोती ही नजर आती हैं। चुनाव ये जीतती हैं और प्रतिनिधित्व पुरुष करते हैं। महिला उम्मीदवार जीतने के बाद फिर से किचन तक सीमित हो कर रह जाती हैं। यही सब यूपी के निकाय चुनाव में भी देखने को मिल रहा है। मेयर, पालिका अध्यक्ष या फिर पार्षद सीट जो महिलाओं के लिए अरक्षित हैं। वहां से महिलाओं को तो दलों ने टिकट दिया। लेकिन, उनके परिवार के पुरुषों को नजर में रखते हुए। आप झांसी से गाजियाबाद और देवरिया तक घूम लीजिये। जहां भी महिला सीट है वहां के चुनाव प्रचार में उन्हें किसी की पत्नी, बेटी, बहू या मां के नाम से जोड़ कर प्रचार किया जा रहा है। प्रचार की कमान पुरुष संभाले हुए हैं। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां के वोटर्स ने अपनी उम्मीदवार की शक्ल तक नहीं देखी।

पहले जहां हमने आपको सुल्तानपुर का हाल बताया था। वहीं आज हम आपको बताते हैं शाहजहांपुर का हाल..

ये भी देखें : सुल्तानपुर नगर पालिका : नेताओं की पत्नियों पर विरासत बचाने का दबाव

यहां निकाय चुनाव के लिए 26 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। लेकिन यहां सपा, बसपा और कांग्रेस की तीन महिला प्रत्याशी अभी भी जनता के बीच नजर नहीं आई हैं। इनके प्रचार की कमान पति या बेटे संभाल रहे हैं। ऐसे में वोटर्स में उत्सुकता है की ये उम्मीदवार प्रचार के लिए सामने आएंगी या फिर हमें उनके पति या बेटे के नाम पर ही वोट डालना है। अपवाद के तौर पर राजघराने की बहू बीजेपी प्रत्याशी जनता के बीच नजर आ रहीं हैं।

नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए सपा ने 68 साल की जहांआरा खान को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने हसीन बेगम को। तो वही कांग्रेस ने नसरीन को नगरपालिका अध्यक्ष पद का टिकट दिया है। भाजपा ने राजघराने की बहू नीलिमा प्रसाद व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की भाभी को टिकट दिया है। भाजपा प्रत्याशी को छोड़कर बाकी तीनो पार्टियों की महिला प्रत्याशी ने अभी तक वोट मांगने के लिए घर की दहलीज नही लांघी है।

सपा उम्मीदवार जहांआरा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीब तनवीर खान की मां है। तनवीर खान पिछले 3 बार से नगरपालिका अध्यक्ष चुनते आए हैं। खान मां के लिए वोट मांग रहे हैं लेकिन अपना चेहरा याद रखने की बात कहते हैं।

बसपा ने नौशाद कुरैशी की मां हसीन बेगम को टिकट दिया है। नौशाद बसपा के बड़े नेता हैं। नौशाद का चुनाव प्रचार भी अपने नाम पर ही चल रहा है। वहीं कांग्रेस ने नसरीन खान को अपना उम्मीदवार बनाया है। नसरीन कद्दावर कांग्रेस नेता तस्लीम खान की पत्नी है। नसरीन का चुनाव प्रचार उनके पति व बेटे के हाथ में हैं

ये सभी महिला उम्मीदवार सिर्फ घर में रह कर आने जाने वालों के जलपान का इंतजाम देखती हैं। ना तो कोई इनकी राय लेता है और ना ही इन्हें राय देने की इजाजत है।

Rishi

Rishi

आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

Next Story