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संसद में BJP की परेशानियां बढ़ा सकती है शिवसेना, नोटबंदी के बाद अब राम मंदिर पर निशाना

मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा के बीच भिड़ंत का फौरी असर अब संसद के मौजूदा सत्र में दोनों पार्टियों के बीच चल रही रस्साकसी में देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र की राजनीति

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tiwarishaliniBy tiwarishalini

Published on 25 Feb 2017 6:48 AM GMT

संसद में BJP की परेशानियां बढ़ा सकती है शिवसेना, नोटबंदी के बाद अब राम मंदिर पर निशाना
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उमाकांत लखेड़ा

नई दिल्ली: मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना-भाजपा के बीच भिड़ंत का फौरी असर अब संसद के मौजूदा सत्र में देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का मानना है कि अभी फिलहाल शिवसेना मोदी सरकार से अपने रिश्ते भले ही खत्म करने की जल्दबाज़ी न दिखाए लेकिन अब वह उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे आने तक अपने पत्ते खोलेगी। शिवसेना का सारा फोकस फिलहाल मुंबई में मेयर पद पर अपना मेयर बिठाने की है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि इसके लिए उसे भाजपा सहयोग करती है या नहीं।

हालांकि भाजपा के खेमे ने मौजूदा नाजुक हालात में शिवसेना-भाजपा सम्बन्धों में कड़वाहट और दूरियां कम करने और बीएमसी में मिलकर काम करने की कोशिशें शुरू की हैं लेकिन दोनों के बीच पैदा हुआ अविश्वास खत्म होता नहीं दिख रहा।

नोटबंदी पर शिवसेना ने संसद में किया था पीएम मोदी का विरोध

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा का मुखर विरोध करने में संसद के भीतर-बाहर शिवसेना ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। जाहिर है कि मुंबई और महारष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के खिलाफ मुद्दा बनाने में शिवसेना की यह सोची समझी रणनीति थी।

शिवसेना बढ़ा सकती है बीजेपी की मुश्किलें

-माना जा रहा है कि शिवसेना अब संसद के भीतर भाजपा की परेशानियों को बढ़ाने की अपनी मुहिम जारी रखेगी।

-बजट सत्र का दूसरा चरण आगामी 9 मार्च से आरम्भ हो रहा है।

-शिवसेना अब सोची समझी रणनीति के तहत कई ज्वलंत मुद्दों पर भाजपा के लिए धीरे-धीरे मुश्किलें खड़ी करती रहेगी।

आगे स्लाइड में पढ़ें पूरी खबर...

-यूपी चुनाव नतीजे 11 मार्च को सामने आ जाएंगे।शिवसेना ने अयोध्या में राम मन्दिर बनाने में भाजपा की ढुलमुल नीति को महाराष्ट्र/मुंबई के स्थानीय चुनावों में भी नोटबंदी के बाद दूसरा बड़ा मुद्दा बनाया था।

-इन चुनावों में शिवसेना का यह नारा भाजपा नेताओं को परेशान कर रहा था कि "मन्दिर वहीं बनाएंगे तारीख नहीं बताएंगे".

-शिवसेना के भीतरी सूत्रों का मानना है कि उसका लक्ष्य 2019 में लोकसभा आम चुनावों के तत्काल बाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अपने बल पर सरकार बनाना है।

-शिवसेना ने 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा पर्याप्त सीटें न दिए जाने के बाद अकेले चुनाव लड़ा था।

-लेकिन बाद में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति के कारण मजबूरन साझा सरकार में भाजपा सरकार में जूनीयर साझेदार बनना पड़ा।

-भाजपा को पटखनी देने के लिए शिवसेना की दूरगामी योजना का हिस्सा आगामी लोकसभा आम चुनावों के पहले गुजरात में इसी साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।

-हालांकि शिवसेना का गुजरात की राजनीति में ज़्यादा वजूद नहीं है लेकिन पाटीदार आन्दोलन की उपज और युवा नेता हार्दिक पटेल व शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के बीच बने गठजोड़ ने गुजरात में भाजपा और पीएम नरेन्द्र मोदी के लिए निजी चुनौती खड़ी कर दी है।

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Excellent communication and writing skills on various topics. Presently working as Sub-editor at newstrack.com. Ability to work in team and as well as individual.

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