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अब बीजेपी को रोकने के लिए कुछ भी करेगी सपा-बसपा, बानगी तो सदन में देखने को मिल गयी

Rishi

RishiBy Rishi

Published on 15 May 2017 9:13 AM GMT

अब बीजेपी को रोकने के लिए कुछ भी करेगी सपा-बसपा, बानगी तो सदन में देखने को मिल गयी
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अनुराग शुक्ला अनुराग शुक्ला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के दौरान पहले विधानसभा सत्र में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जो सूबे में सियासत की शक्ल बदल सकते हैं। दरअसल सियासत में संकेत अहम हैं, और विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान संकेत चीख-चीख कर इशारा कर रहे थे। अभिभाषण के संयुक्त सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा की कम ताकत की भरपाई विधानपरिषद के विधायकों और नए तरीके से की। वहीं बसपा ने उसके सुर में सुर मिलाकर खूब साथ दिया। सवाल ये कि क्या सदन की एकता सियासत के संकेत हैं।

विपक्ष ने विरोध में ताक पर रखी सदन की परंपरा

विपक्ष ने अपनी कम संख्या के लिए कई नए नुस्खे निकाले। जब राज्यपाल ने हंगामे के बीच पूरा अभिभाषण पढना शुरु किया तो सपा के विधायक राजेश यादव उर्फ राजू ने जमकर सीटी बजाई। कागज के गोले इस कदर फेके गये कि मार्शलों को राज्यपाल को बचाने के लिए पूरे अभिभाषण के दौरान टेनिस और बैडमिंटन खेलते रहना पड़ा। राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ा पर हंगामे की तेजी में कोई कमी नहीं आई। यह बात और है, कि इस दौरान सपा के विधायक जहां हंगामा करते रहे वहीं अखिलेश यादव हेडफोन लगाकर पूरे संजीदगी से अभिभाषण सुनते रहे।

सपा बसपा एक साथ, एक दूसरे के प्रति नरम भी रहे नेता

समाजवादी पार्टी ने जहां विरोध की कमान संभाली तो बसपा ने भी बखूबी साथ दिया। सदन के बाहर आकर भी दोनों दलों के नेता इशारों इशारों में बहुत कुछ कह गये। नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के नेता विधायक दल रामगोविंद चौधरी ने कहा कि दोनों दलों को मिलकर ही सोचना होगा वरना सांप्रदायिक शक्तियां सब कुछ बर्बाद कर देंगी। वहीं सपा से बसपा में गए बसपा के महासचिव अंबिका चौधरी ने कहा कि दोनों दलों को एक होकर ही सोचना होगा। भाजपा को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने में परहेज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या हैं ये संकेत

सदन के बाहर किसी भी नेता ने खुलकर नहीं बोला और फैसला पार्टियों के हाईकमान पर छोड़ दिया। पर हालात कुछ ऐसे हैं, कि ये संकेत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही बसपा को साथ लाने के संकेत दे चुके है। भाजपा को रोकने का बिहार प्रयोग सफल रहा है। ऐसे में जाहिर है कि 2019 की लडाई में खेमेबंदी के पहले बीज के तौर पर यूपी विधानसभा की इस फ्लोर एक्सरसाइज को देखा ही जाएगा।

Rishi

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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