विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज की पा‍क को खरी-खरी, UNGA के सत्र में लताड़ा

Published by sudhanshu Published: September 29, 2018 | 10:32 pm
Modified: September 30, 2018 | 8:50 am

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 73वें सत्र में शनिवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने लताड़ लगाते हुए पाकिस्तान पर भारत में आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया है। सुषमा स्वराज ने कहा कि न्यूयॉर्क में 9/11 की घटना और मुंबई में 26/11 की घटना ने शांति की उम्मीदों को बर्बाद कर दिया है। भारत इसका शिकार हो रहा है और भारत में आतंकवाद की चुनौती हमारे पड़ोसी देश के अलावा किसी और से नहीं आ रही है। अपने संबोधन के दौरान सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान ऐसा देश है जिसे आतंकवाद फैलाने के साथ-साथ अपने कृत्‍यों को नकारने में भी महारथ हासिल है। पाकिस्‍तान ने इस रवैये को अपनी आदत बना लिया है।

जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद को दुनिया के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियां बताया है। पाकिस्तान द्वारा बातचीत के ऑफर पर सुषमा ने कहा कि भारत हमेशा बातचीत से मुद्दों को सुलझाने का पैरोकार रहा है, लेकिन पाकिस्तान हमेशा धोखा देता है। बातचीत से जटिल से जटिल मुद्दे सुलझाए जा सकते हैं। पाक के साथ वार्ताओं के दौर चले हैं। लेकिन हर बार पाकिस्तान की हरकतों के चलते बातचीत रुकी है। पाक ने हमेशा दगा किया है।

इंडो‍नेशिया के भूकंप का भी जिक्र

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने भाषण के दौरान इंडोनेशिया में आए भूकंप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया भूकंप और सुनामी से प्रभावित हुआ है। मैं, भारत की तरफ से, आपदा के लिए इंडोनेशिया सरकार और लोगों के प्रति शोक व्यक्त करती हूं। इस आपदा का सामना करने के लिए मैं इंडोनेशिया को आश्वासन देती हूं। विदेश मंत्री ने अपने भाषण में आयुष्‍मान भारत, उज्‍जवला योजना, जन धन खाते, मातृत्‍व योजना का भी जिक्र किया है।

सुषमा स्वराज ने कहा कि परिवार ही वसुधैव कुटुंबकम की बुनियाद है। परिवार प्यार से चलता है, व्यापार से नहीं। परिवार मोह से चलता है, लोभ से नहीं। परिवार संवेदना से चलता है, ईर्ष्या से नहीं। परिवार सुलह से चलता है, कलह से नहीं। इसीलिए हमें संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांत पर चलाना होगा। संयुक्त राष्ट्र को स्वीकार करना होगा कि मौलिक सुधार की जरूरत है। सुधार कॉस्मेटिक नहीं हो सकता है। सुधार आज ही शुरू होना चाहिए, क्योंकि कल बहुत देर हो सकती है। सुधार को तुरंत ही अमल में लाना होगा।