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फिर उठी पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश बनाने की मांग, जल्‍द शुरू होगा जनांदोलन

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 1 Sep 2018 10:30 AM GMT

फिर उठी पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश बनाने की मांग, जल्‍द शुरू होगा जनांदोलन
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मेरठ: बड़े राज्यों का शासन ठीक से नहीं चल पाने की बात पर जोर देते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ राष्ट्रीय लोकदल नेता डॉ.मैराजुद्दीन अहमद ने शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य की वकालत करते हुए कहा कि हम अलग प्रदेश लेकर ही रहेंगे। इसके लिए चाहे हमें कितनी बड़ी से बड़ी कुरबानी क्यों ना देनी पड़े।

विभाजन के अलावा नहीं है विकल्‍प

उत्तर प्रदेश विभाजन मंच के सम्मेलन में पूर्व मंत्री डॉ.मैराजुद्दीन अहमद ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों का शासन कभी ठीक से नहीं किया जा सकता है। इसलिए अब जनता के पास और कोई विकल्प नहीं है। अब प्रदेश विभाजन की मांग को जनान्दोलन बनाना ही होगा। क्योंकि समस्यायें अब विकराल रुप लेकर अमानवीय की हद तक जा पहुंची है। इस मौके पर मंच के मुख्य संयोजक महिपाल सिंह ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश अलग राज्य के गठन की मांग को लेकर सामूहिक उपवास से आंदोलन शुरु करने की घोषणा करते हुए कहा कि अपनी मांग के लिए हम बड़ी से बड़ी कुरबानी देने को तैयार हैं।

बंटवारा ही दूर करेगा समस्‍याएं

पूर्व मंत्री डॉ.मैराजुद्दीन अहमद ने कहा कि समय का तकाजा यही है कि जल्द से जल्द पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य का गठन कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा ही प्रदेश की अधिकांश समस्याओं का समाधान है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य के गठन की मांग के लिए ही उत्तर प्रदेश विभाजन मंच का गठन किया गया गया है। मंच का स्वरुप पूरी तरह अराजनीतिक है तथा इसमें सभी वर्गों एवं धर्मों व जातियों के लोंगो को जोड़ा जायेगा। साथ-साथ प्रदेश विभाजन का समर्थन करने वाले राष्ट्रीय व प्रदेश नेताओं को भी मंच के कार्यक्रमों में आमन्त्रित करके समर्थन प्राप्त किया जायेगा।

इस मांग को मानना सरकार की मजबूरी

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव चौधरी यशपाल सिंह ने मंच के इस आंदोलन से जुड़ने की घोषणा करते हुए कहा कि किसानों की उपेक्षा बेरोजगारी व कानून व्यवस्था को लेकर लोगों की अलग प्रदेश की कुलबुलाहट को पहचानकर ही उत्तर प्रदेश विभाजन मंच का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की इस जायज मांग को सरकार को एक ना एक दिन मानना ही पड़ेगा।

शोषित मुक्ति वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश नवल ने कहा कि हमें अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धताओं को छोड़ अपने तथा अपनी नस्लों के भविष्य के लिए लड़ना पड़ेगा नही तो एक अन्धकारमय भविष्य अपनी पीढ़ी को विरासत में सोंपने के लिए तैयार रहना होगा।

एक लाख संकल्‍प पत्र भरेंगे लोग

मंच के संयोजक महिपाल सिंह ने इस मौके पर कहा कि आंदोलन शुरु करने से पूर्व एक लाख संकल्प पत्र भरवाने का कार्य किया जायेगा तथा जन-जागरण पद यात्राओं के माध्यम से प्रदेश की जनता को जागृत कर इस आंदोलन को सश्क्त बना कर केन्द्र सरकार को उत्तर प्रदेश के पुर्नगठन के लिए बाध्य किया जायेगा।

यहां बता दें कि 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को चार भागों पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्य उत्तर प्रदेश व पूर्वांचल में बांटने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। वैसे, पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश बनाने की मांग स्वतंत्रता आंदोलन से ही उठती रही है। 1991 में लंदन में हुए गोलमेज सम्मेलन में भी यह बात प्रमुखता से उठी थी।

पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश रहेगा हमेशा आगे

इसमें दो राय नहीं कि यदि प्रदेश का बंटवारा हो जाता है तो अन्य प्रदेशों को तो इसका फायदा मिलेगा ही पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की चांदी कट जाएगी। सम्पन्नता के मामले में यह प्रदेश हरियाणा और पंजाब को भी पीछे छोड़ देगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश खेती के मामले में बहुत सम्पन्न क्षेत्र माना जाता है। तराई क्षेत्र होने की वजह से यह क्षेत्र बहुत उपजाऊ हो है और यहां पर बड़े स्तर पर पैदावार उगाई जाती है। वैसे तो यह क्षेत्र गन्ने की फसल के नाम से जाना जाता है पर यहां पर गेहूं, चावल के साथ चना, दाल, बाजरा की पैदावार भी प्रमुखता से उपजाई जाती है। पर कुछ दिनों से जिस तरह से बकाया गन्ना भुगतान और सरकारों के उपेक्षित रवैये के चलते यहां के किसान टूटते जा रहे हैं। सीमांत किसानों का खेती से मोह भंग हो रहा है। यही वजह है कि ये लोग अब अपना अलग प्रदेश चाहते।

यह माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 70 फीसदी राजस्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश देता है पर सरकारी स्तर पर यहां पर विकास के नाम पर ठेंगा दिखा दिया जाता है। इसका कारण यहां पर राजनीतिक जागरूकता का अभाव माना जाता है। यही कारण है कि तमाम प्रयास और आंदोलन के बावजूद यहां पर हाईकोर्ट की बैंच स्थापित नहीं हो सकी।

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