एक ट्वीट पर मदद पहुंचाने वाली सुषमा स्वराज की कमी क्या पूरी हो पाएगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में विदेश मंत्रालय का जिम्मेदारी संभालने वाली सुषमा स्वराज ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रियों की शपथ के बाद एक ट्विटर पर एक विदा संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी का धन्यवाद किया।

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में विदेश मंत्रालय का जिम्मेदारी संभालने वाली सुषमा स्वराज ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्रियों की शपथ के बाद एक ट्विटर पर एक विदा संदेश लिखा, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी का धन्यवाद किया।

सुषमा के इस संदेश के बाद ट्विटर पर उनके प्रशंसकों में निराशा छा गई। लोग पूर्व विदेश मंत्री सुषमा की तारीफ करते दिखे। बता दें कि मोदी के दूसरे कार्यकाल में सुषमा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।

राजनीति के जानकारों की मानें तो सुषमा स्वराज का विदेशमंत्री के तौर पर कार्यकाल बेहद ही अच्छा रहा है। देश के अंदर जहां एक छोटे से काम के लिए लोगों को संबन्धित अधिकारी या मंत्रियों के विभागों के कई-कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते है।

वहीं अगर बात करें सुषमा स्वराज की तो वह एक ट्वीट पर विदेश में फंसे लोगों को मदद पहुंचाती थी। जिस पर सोशल मीडिया में उनकी कई बार प्रशंसा भी हो चुकी है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या संसद में उनकी कमी पूरी हो पायेगी? क्या नये मंत्री के पदभार ग्रहण करने के बाद से लोगों को उसी गति से मदद मिल पायेगी? ऐसे कई सवाल है। जो लोगों के दिमाग में बने हुए है।

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रिटायरमेंट के सवाल पर सुषमा ने पति को दिया था ये जवाब
नवंबर 2018 में सुषमा स्वराज ने ये ऐलान किया था कि वो 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी। इस घोषणा के बाद सुषमा के पति और पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने कहा था, ”एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था। आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं। ”
66 साल की सुषमा राजनीति में 25 बरस की उम्र में आईं थीं। सुषमा के राजनीतिक गुरु लाल कृष्ण आडवाणी रहे थे।

सात बार चुनी गई सांसद
सुषमा स्वराज एक प्रखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी पार्लियामेंटेरियन और कुशल प्रशासक मानी जाती हैं।
एक वक़्त था जब बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद सुषमा और प्रमोद महाजन सबसे लोकप्रिय वक्ता थे। फिर बात संसद की हो या सड़क की। सुषमा स्वराज की गिनती भाजपा के डी(दिल्ली)-फ़ोर में होती थी।
बीते चार दशकों में वे 11 चुनाव लड़ीं, जिसमें तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ीं और जीतीं। सुषमा सात बार सांसद रह चुकी हैं।

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आडवाणी का इस मुहिम में दिया था साथ
इमरजेंसी के दिनों में बड़ौदा डायनामाइट केस में फंसे जार्ज फ़र्नांडिस ने जेल में ही रहकर मुज़फ़्फरपुर से चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया था।
तब सुषमा स्वराज ने हथकड़ियों में जकड़ी उनकी तस्वीर दिखा कर ही पूरे क्षेत्र में प्रचार किया।

जब चुनाव परिणाम आया तो जॉर्ज दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे।  राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि साल 2013 में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने से रोकने की लाल कृष्ण आडवाणी की मुहिम में वे आडवाणी के साथ थीं।

2014 में जीत के बाद नहीं देखा पीछे
इस मुहिम में उन्होंने आखिर तक आडवाणी का साथ दिया पर 2014 में मोदी की जीत के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जानकारों और मोदी के आलोचकों का मानना था कि इस अपराध की सज़ा सुषमा को भविष्य में मिलेगी।

इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी ऐसी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्री का पद संभाला था। बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ट्विटर पर काफ़ी सक्रिय रहती थीं। फिर चाहे विदेश में फँसे लोगों की मदद करना हो या लोगों का पासपोर्ट बनवाना।  कुछ मौक़ों पर छोटी बातों पर मदद मांगते लोगों को सुषमा ने मज़ाकिया अँदाज़ में डांट भी लगाई थी।

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