रिलेशनशिप

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन की अवधि में लोग घरों से बाहर नहीं जा रहे हैं। इस स्थिति में लोगों को घर पर ही रहने और घर से काम करने के निर्देश हैं। लॉकडाउन का ये दौर कई लोगों को मुसीबत का समय लग रहा है, कई लोग इस समय का इस्तेमाल अपने रिश्तों में मजबूती लाने के लिए कर रहे हैं।

सान चाहे किसी भी क्षेत्र का हो,एक चीज जो सबके  साथ कॉमन रहती वो है प्यार, जो उसकी कामयाबी में चार चांद लगाती है। प्यार करना प्यार में पडना खुश रहने के लिए उतना ही जरूरी है जितना जीने के लिए हवा। ये प्यार कभी भी किसी से कही भी हो सकता है।

 जब तक लड़के-लड़की की शादी नहीं होती है तब तक सब उनकी शादी के लिए परेशान रहते है। जब शादी हो जाती है तो सबके पास एक ही सवाल होता है। गुड न्यूज कब सुना रहे हो। अनजान लोगों को तो नजरअंदाज किया जा सकता है इस सवाल पर , लेकिन अपनों को नहीं।

ज्यादातर बच्चे स्कूल जाने के नाम से कतराते हैं पैरेंट्स उनके रोज़ के ना-नुकुर से परेशान होते हैं। कई बार तो वे समझ ही नहीं पाते कि बच्चा ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। बच्चे के मन में क्या चल रहा है ये जानने के लिए कुछ बातों समझनी जरूरी हैं।  कुछ ऐसी बातें, जो शायद बच्चे की ना का कारण हो।

हर साल सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखती है। कहा जाता है कि वटवृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और डालियों और पत्तियों में भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इस व्रत में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं, सावित्री-सत्यवान की की कथा सुनने के  बाद महिलाओं की अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है।

 कोरोना ने हर चीज को दूर कर दिया है। इसकी वजह से रिलेशनशिप में भी डिस्टेंस बढ़ गया है, लेकिन इसके बावजूद भी दो लोगों के बीच के प्यार को कम करने या दूर करने में कोरोना कामयाब नहीं हो पाया है। ऑनलाइन के जमाने में जब प्यार भी इंटरनेट से शुरू होने लगा है।

आज के समय में बच्चों, की परवरिश कैसे करें, यह बात अभिभावकों, के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जहां आधुनिक अभिभावक चाहते है की उनका बच्चा, किसी भी स्थिति में किसी से कम नहीं हो, और बस इसी भागदौड़ मे लगे रहते हैं।

कोरोना वायरस को लेकर सारी दुनिया चीन को जिम्मदार ठहरा रही है।पने यहां वायरस फैलने से रोकने की कोशिश समय पर नहीं की और बाकी दुनिया को भी अंधेरे में रखा। इस पर डब्ल्यूएचओ (WHO) ने शुक्रवार को कहा कि चीन के वुहान मार्केट ने पिछले साल कोविड-19 के संक्रमण को फैलाना में अहम भूमिका निभाई है।

मां का जिक्र आते ही जहन में इतनी करूण तस्वीर उभरती है कि इसका जिक्र करना भी मुश्किल होता है। मां का तो कद ईश्वर से भी बड़ा है। मां के ममत्व की तुलना शायद ही किसी से हो। मां सिर्फ मां होती है उसके जैसा ना कोई दूसरा है ना कभी होगा,

वो  मां नहीं है क्योंकि मां तो मां होती है। उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। फिर भी वो मां से कम भी तो नहीं है। उनके साथ भी तो जुड़ा है मां शब्द ,जिसमें पूरी कायनात समा जाए,  वो मां शब्द जिसके साथ जो भी जुड़ जाए, वो शख्स पूरा हो जाता है। तो फिर हम इन्हें क्यों ना कहें हम मां, ये भी तो है सासू मां।