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सभी वैक्सीन के होते हैं कुछ सामान्य साइड इफेक्ट, जानिए क्या-क्या होती हैं परेशानियां

आमतौर पर कोई भी टीका लगने के बाद त्वचा का लाल होना, टीके वाली जगह पर सूजन और कुछ वक्त तक इंजेक्शन का दर्द होना आम बात है। कुछ लोगों को पहले तीन दिनों में थकान, बुखार और सिरदर्द भी होता है। इसका मतलब होता है कि टीका अपना काम कर रहा है और शरीर ने बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी बनाना शुरू कर दिया है।

Ashiki Patel

Ashiki PatelBy Ashiki Patel

Published on 8 Jan 2021 3:31 PM GMT

सभी वैक्सीन के होते हैं कुछ सामान्य साइड इफेक्ट, जानिए क्या-क्या होती हैं परेशानियां
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सभी वैक्सीन के होते हैं कुछ सामान्य साइड इफेक्ट
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लखनऊ: अब भारत में वैक्सीन लगाने का काम शुरू होने वाला है सो लोगों में वैक्सीन के साइड इफ़ेक्ट की भी चर्चा है। आमतौर पर कोई भी टीका लगने के बाद त्वचा का लाल होना, टीके वाली जगह पर सूजन और कुछ वक्त तक इंजेक्शन का दर्द होना आम बात है। कुछ लोगों को पहले तीन दिनों में थकान, बुखार और सिरदर्द भी होता है। इसका मतलब होता है कि टीका अपना काम कर रहा है और शरीर ने बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी बनाना शुरू कर दिया है। साइड इफ़ेक्ट के बारे में बहुत चिंता करने की बात नहीं है, हाँ अगर कोई बीमार है या किसी एलर्जी से ग्रसित है तो उसे जरूर अपने डाक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।

अब तक कोरोना के जिन टीकों को अनुमति मिली है, परीक्षणों में उनमें से किसी में भी बड़े साइड इफेक्ट नहीं मिले हैं। यूरोप की यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (ईएमए), अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) और विश्व स्वास्थ्य संगठन तीनों ने इन्हें अनुमति दी है। एक दो मामलों में लोगों को वैक्सीन से एलर्जी होने के मामले सामने आए थे लेकिन परीक्षण में हिस्सा लेने वाले बाकी लोगों में ऐसा नहीं देखा गया।

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फाइजर बायोएनटेक

corona vaccine for children-pfizer

जर्मनी और अमेरिका ने मिलकर जो टीका बनाया है वह बाकी टीकों से अलग है। वह एमआरएनए का इस्तेमाल करता है यानी इसमें कीटाणु नहीं बल्कि उसका सिर्फ एक जेनेटिक कोड है। यह टीका अब कई लोगों को लग चुका है। अमेरिका में एक और ब्रिटेन में दो लोगों को इससे काफी एलर्जी हुई। इसके बाद ब्रिटेन की राष्ट्रीय दवा एजेंसी एमएचआरए ने चेतावनी दी कि जिन लोगों को किसी भी टीके से जरा भी एलर्जी रही हो, वे इसे ना लगवाएं।

मॉडेर्ना

moderna vaccine

अमेरिकी कंपनी मॉडेर्ना का टीका भी काफी हद तक फाइजर के टीके जैसा ही है। परीक्षण में हिस्सा लेने वाले करीब दस फीसदी लोगों को थकान महसूस हुई। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके चेहरे की नसें कुछ वक्त के लिए पेरैलाइज हो गई। कंपनी का कहना है कि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ऐसा टीके में मौजूद किसी तत्व के कारण हुआ या फिर इन लोगों को पहले से ऐसी कोई बीमारी थी जो टीके के कारण बिगड़ गई।

एस्ट्रा जेनेका

ब्रिटेन और स्वीडन की कंपनी एस्ट्रा जेनेका के टीके के परीक्षण को सितंबर में तब रोकना पड़ा जब उसमें हिस्सा लेने वाले एक व्यक्ति ने रीढ़ की हड्डी में सूजन की बात बताई। इसकी जांच के लिए बाहरी एक्सपर्ट भी बुलाए गए जिन्होंने कहा कि वे यकीन से नहीं कह सकते कि सूजन की असली वजह वैक्सीन ही है। इसके अलावा बाकी के टीकों की तरह यहां भी ज्यादा उम्र के लोगों में बुखार, थकान जैसे लक्षण कम देखे गए हैं।

स्पूतनिक 5

Russia Corona Vaccine's Sputnik 5

रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-5 को अगस्त में ही मंजूरी दे दी गई थी। किसी भी टीके को तीन दौर के परीक्षणों के बाद ही बाजार में लाया जाता है, जबकि स्पूतनिक के मामले में दूसरे चरण के बाद ही ऐसा कर दिया गया। रूस के अलावा यह टीका भारत में भी दिया जाना है। जानकारों की शिकायत है कि इसके पूरे डाटा को सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए साइड इफेक्ट्स के बारे में ठीक से नहीं बताया जा सकता।

कोवैक्सीन

covaxine

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को सरकार ने इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अनुमति दी है लेकिन इसके भी तीसरे चरण के परीक्षणों के बारे में जानकारी नहीं है। ये कितनी कारगार है अभी ये स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से इस टीके को शर्तों के साथ अनुमति दी गयी है।

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बच्चों के लिए टीका

आम तौर पर पैदा होते ही बच्चों को टीके लगने शुरू हो जाते हैं लेकिन कोरोना के टीके के मामले में ऐसा नहीं होगा। इसकी दो वजह हैं, एक तो बच्चों पर इसका परीक्षण नहीं किया गया है और न ही इसकी अनुमति है। और दूसरा यह कि महामारी की शुरुआत से बच्चों पर कोरोना का असर न के बारबार देखा गया है। इसलिए बच्चों को यह टीका नहीं लगाया जाएगा। साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी फिलहाल यह टीका नहीं दिया जाएगा।

एक सुरक्षित टीके की बात करें तो किसी टीके से अगर एक वृद्ध व्यक्ति की उम्र 20 प्रतिशत घटती है लेकिन साथ ही अगर 50 हजार में से सिर्फ एक व्यक्ति को उससे एलर्जी होती है, तो ऐसे टीके को सुरक्षित मानेंगे। यूरोप में इसी पैमाने पर टीकों को अनुमति दी जा रही है।

नीलमणि लाल

Ashiki Patel

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