कारगिल

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाक़ी निशाँ होगा। वर्ष 1916 में जगदम्बा प्रसाद मिश्र हितैषी ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए यह गौरव गाथा लिखी थी। कारगिल विजय के बीसवें साल में जिस तरह समूचे देश ने कारगिल में शहीद हुए 527 जाबांज जवानों …