प्रवासी मजदूर

इन सबके बीच मैंने बस यही अनुभव किया कि भारत मे सरकारे आएंगी और जाएंगी लेकिन इन लोगो का समय ना बदला है और ना ही बदलेगा। बस ये लोग अपने जीवन की अच्छी कल्पना की उम्मीद में जीवन भर चलते ही रहेंगे।

सारे कोरोना-युद्ध को उन्होंने एक व्यक्ति का महिमा-मंडन बता दिया और यह आरोप भी ठोक दिया कि केंद्र सरकार सारी शक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रित करके संविधान के संघवाद का उल्लंघन कर रही है। यह बात इंदिरा गांधी की बहू के मुंह से सुनने में कितनी हास्यास्पद लगती है।