ब्रजलाल पूर्व डीजीपी

ढेका, सिल- बट्टा, ओखली - मूसल, चकिया, जाँता, समाप्त हो गये जो घर के जीवनयापन के यंत्र थे, जिससे भरपूर व्यायाम हो जाता था। इन्हीं कारणों से गावों में मधुमेह , हार्ट- अटैक, रक्तचाप, कैंसर की बीमारी आम हो गयी है। काश आधुनिकता के साथ हमारे जीवन जीने के तरीक़े में इतना बदलाव न होता तो हम स्वस्थ जीवन के साथ अपने पुरखों की तरह मस्त और निरोग होते।

मुझे और मेरे सहयोगी एसआई बृज़पाल सोलंकी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा बहादुरी के लिए पुलिस मेडल प्रदान किया गया था। दिल्ली सरकार ने भी मुझे एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया था। मै उस समय के कुछ फ़ोटो भी शेयर कर रहा हूँ जो मुठभेड़ स्थल पर लिए गये थे।