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एडीआर की रिपोर्ट को अगर हम ध्यान से देखें तो बिहार विधानसभा में 240 विधायकों में से 136 विधायकों पर आपराधिक केस दर्ज हैं। कहने का मतलब ये है कजी ये तमाम विधायक दागी हैं।

हर वित्तीय वर्ष में राजनीतिक दलों को जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी सोर्स से 20,000 रुपये से अधिक के दान की घोषणा करना आवश्यक है। ऐसे में हर पार्टी के कोषाध्यक्ष को 20,000 रुपये से अधिक के चंदे पर जानकारी दी जाती है।

यहां ध्यान देने की बात यह है कि सीपीएम की आय इन वर्षों में 3.71 फीसद घटकर 3.887 करोड़ रही है। एनसीपी ने 2017-18 में अपनी आय 8.15 करोड़ रुपये घोषित की थी लेकिन 2018-19 में अपनी ऑडिट रिपोर्ट नहीं दी है।

भारत में पिछले करीब एक साल से आर्थिक सुस्ती का दौर जारी है, जिसकी वजह से लोगों की आमदनी के साथ ही खर्च करने की क्षमता घट रही है। लेकिन इस दौरान एनसीपी को छोड़कर देश की 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की आय में करीब 166 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

जेईडब्ल्यू व एडीआर ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में पहले से पांचवें चरण तक चुनाव लड़ने वाले सभी 1216 उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में चुनाव लड़ने वाले 222 (18 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये हैं, जिनमें बलात्कार, हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, महिलाओं के ऊपर अत्याचार इत्यादि से सम्बन्धित अपराध शामिल हैं।

झारखंड इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के पांचवें चरण में चुनाव लड़ने वाले सभी 237 उम्मीद्वारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। 237 में से 58 (25 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किये हैं। 42 (18 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किये हैं।

113 (51%) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता 5वीं और 12वीं के बीच घोषित की हैं, जबकि 78 (35 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता स्नातक और इससे ज़्यादा घोषित की हैं। 28 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता साक्षर घोषित की हैं।

नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स ने इस सर्वेक्षण के लिए 4896 में से 4822 सांसदों और विधायकों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। जिसमें पिछले 5 वर्षों (2014-2019) में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदशों के 776 में से 759 सांसदों और 4120 में से 4063 विधायकों के शपथपत्र शामिल हैं।

प्रमुख राजनीतिक दल जैसे बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, डीएमके, आरजेडी, शिवसेना, तेलुगुदेशम पार्टी, एआईएमआईएम और आल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक भी शामिल हैं। यह खुलासा एडीआर की रिपोर्ट में हुआ है।

नॉमिनेशन और एफिडेविट के विश्लेषण पर आधारित एडीआर की रिपोर्ट से साफ है कि जीत दिलवाने की गारंटी देने वाले क्रिमिनल और अमीर बैकग्राउंड के उम्मीदवार को मैदान में उतारने से किसी भी दल को न तो कोई परहेज है और न ही कोई गुरेज।