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भारत में पिछले करीब एक साल से आर्थिक सुस्ती का दौर जारी है, जिसकी वजह से लोगों की आमदनी के साथ ही खर्च करने की क्षमता घट रही है। लेकिन इस दौरान एनसीपी को छोड़कर देश की 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की आय में करीब 166 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

झारखंड इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के 30, भारतीय जनता पार्टी के 25, कांग्रेस के 16, झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक), आजसू के दो, निर्दलीय दो, कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माले)(लिबरेशन), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एक, राष्ट्रीय जनता दल एक कुल 81 नवनिर्वाचित विधायकों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया।

नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स ने इस सर्वेक्षण के लिए 4896 में से 4822 सांसदों और विधायकों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया। जिसमें पिछले 5 वर्षों (2014-2019) में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदशों के 776 में से 759 सांसदों और 4120 में से 4063 विधायकों के शपथपत्र शामिल हैं।

एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजेडी के 33 (30 प्रतिशत), बीजेपी के 10 (44 प्रतिशत) विधायक, कांग्रेस के पांच विधायकों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले हैं।

लोकसभा चुनाव में जीते सांसदों की औसत संपत्ति 20.93 करोड़ है। नयी लोकसभा के 266 सदस्य ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच करोड़ या उससे ऊपर है। 2014 में करोड़पति सांसदों की संख्या 443 (82 फीसदी) थी जबकि 2009 में यह आंकड़ा 315 (58फीसदी) था।

दिल्ली सरकार मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर खरी नहीं उतर रही। प्राथमिकताओं के आधार पर देखें तो दिल्ली सरकार का प्रदर्शन औसत से भी कम है। मतदाताओं की सबसे पहली प्राथमिकता यातायात जाम से राहत दिलाना है। इसके बाद प्रदूषण दूर करने और रोजगार के बेहतर अवसर, महिला सशक्तीकरण व सुरक्षा हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में दावा किया गया कि रोजगार के बेहतर मौके, स्वास्थ्य सुविधाएं और पेयजल उन तीन शीर्ष मुद्दों में शामिल हैं जिन पर मतदाता चाहते हैं कि सरकार काम करे।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रपट के अनुसार, प्रमुख पार्टियों में बीजेपी के 43 में से 18 उम्मीदवारों (42 %) ने, कांग्रेस के 45 में से 14 (31% ) ने, बसपा के 39 में से छह (15%) ने और आम आदमी पार्टी के 14 में से तीन (21%) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। कुल 313 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 29 (नौ% ) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

 हिमाचल प्रदेश में बेहतर रोजगार के अवसर (63.60%), कृषि (47.02%) और बेहतर अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए पानी की उपलब्धता (41.10%) शीर्ष तीन मतदाता प्राथमिकताओं में शामिल है।

लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 7 प्रदेशों की 59 सीटों पर 12 मई को मतदान होगा। इस चरण में 189 यानी 20 फीसदी दागी उम्मीदवार मैदान में हैं। 146 यानी 15  फीसदी प्रत्यााशी ऐसे हैं जो गंभीर अपराध के आरोपी हैं।