allahabad high court

कोर्ट ने कॉरिडोर के निर्माण कार्यों के ख़िलाफ़ दाख़िल अवमानना याचिका को भी खारिज करते हुए तीनों याचिकाकर्ताओं पर पांच- पांच हज़ार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को गाजीपुर के जिलाधिकारी के इस आदेश को रद्द करते हुए फैसला सुनाया, जिसमें लाउडस्पीकर से मस्जिदों में अजान करने पर रोक लगाई गयी थी।

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एशिया के सबसे अधिक मुकदमे तय करने वाले न्यायाधीश बन गये हैं। 23अप्रैल 2020को सेवा अवकाश लेने तक न्यायमूर्ति अग्रवाल ने एक लाख चालीस हजार साठ मुकदमे तय कर कीर्तिमान स्थापित किया।

महानिबंधक ने कहा है कि कोरोना महामारी और प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसके बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सुरक्षा कारणों से 18 अप्रैल को जारी आदेश के तहत 20 अप्रैल से डिस्ट्रिक कोर्ट खोले जाने की तिथि को अब बढ़ा कर 27 अप्रैल कर दिया है।

सीएए के प्रदर्शनों के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए लाया गया योगी सरकार का महत्वाकांक्षी अध्यादेश कानूनी दांव पेंच में फंसता नज़र आ रहा है। इस अध्यादेश को संविधान विरोधी बताकर इसे रद्द किये जाने की मांग को लेकर दाखिल अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब तलब   किया है।

कोरोना वायरस से निपटने के उपायों पर सुझाव के लिए सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने न्यायमूर्ति बी के नारायण की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति में न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी, बार एसोसिएशन व एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सदस्य है। जो इस मामले की मानीटरिंग कर रही है।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई हिंसा के (CAA Violence) बाद योगी सरकार ने उपद्रवियों पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनका पोस्टर जारी कर दिया था, लेकिन सरकार की ये कार्रवाई बेकफायर होती नजर आ रही है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव इन रिलेशन में रहने वालों विवाहित या विवाहिता के लिए के लिए सख्त निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने ऐसी ही एक प्रकरण में तीन बच्चों की माँ को सुरक्षा व संरक्षण देने से इंकार कर दिया है।  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि बिना तलाक दिये पति या पत्नी से अलग होकर लिव इन रिलेशन में रहने वालों को कोर्ट संरक्षण नहीं दे सकती है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि एससी/एसटी के तहत कोई मामला तभी बनता है, जब अपराध सार्वजनिक स्थान यानि कि पब्लिक प्लेस पर हुआ हो।