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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को झकझोर सा दिया है। अमेरिका महाशक्तिशाली भी इसकी मार से उभर नहीं पा रहा है। अमेरिका समेत कई देश इसके लिए चीन को कसूरवार बता रहा है।

अमेरिका में इन दिनों मूर्तियों को गिरने, खंडित करने का सिलसिला चल पड़ा है। अश्वेत जॉर्ज फ्लोएड की पुलिस के हाथों हुई मौत के बाद जगह-जगह...

 भारत-चीन में गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के चलते सीमा पर तनातनी अब पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। ऐसे में दोेनो देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी काफी ज्यादा नोक-झोंक होती दिखाई दे रही है।

यूएस के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के एक बयान ने डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बोल्टन का बयान यूएस की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है, जो आगामी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित कर सकता है।

ऐसे में हालातों को देखते हुए अमेरिका ने पहली बार अपने 11 न्यूक्लियर कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के विमानवाहक पोत में से तीन को एक साथ प्रशांत महासागर में चीनी सीमा के बहुत पास तैनात कर दिया है।

महाशक्तिशाली देश अमेरिका दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है। यहां एक से बढ़कर एक अमीर लोग रहते हैं। ये अमीर लोगों अपनी धन-दौलत को मैनेज करने के लिए लोगों को ढूंढा करते हैं।

बीते दिन गलवान घाटी भारत और चीन के बीच हुई हिंसात्मक लड़ाई पर पूरी दुनिया अपनी नजर बनाए हुए है। घाटी में हुई इस लड़ाई में भारत के 20 जवान शहीद हो गए, वहीं चीन को भी काफी नुकसान हुआ है लेकिन अभी उसने आधिकारिक तौर पर बताया नहीं है।

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना की वैक्‍सीन mRNA-1273 के तीसरे चरण का ट्रायल अगले महीने शुरू होने जा रहा है जिसमें 30 हजार लोग हिस्‍सा लेंगे। इस बीच चीन की कंपनी ने कहा है कि वैक्‍सीन लगने के बाद 90 प्रतिशत लोगों में कोरोना से लड़ने की क्षमता सामने आई है।

अहिंसा के उपासक का हिंसक अंत हुआ। वे लारोइन मोटेल की छत से संबोधित कर रहे थे : “हम अब कामयाब होंगे। शायद मैं आपके साथ मंजिल तक न पहुंच सकूं|” दूसरे दिन ही (4 अप्रैल 1963) उन्हें जेम्स अली राय नामक गोरे ने गोली मार दी।

कई देश कोविड 19 वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं तो वहीं कई ऐसे भी देश हैं, जो दूसरे देशों से वैक्सीन लेने की तैयारी कर रहे हैं।