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छठ पर्व को सबसे ज्‍यादा बिहार में मनाया जाता है। बिहार में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं, जो धार्मिक स्नान की वजह से ही प्रसिद्ध हैं।

नवरात्रि एक लोकप्रिय पर्व है। ये पूरे देश में अनेक रूपों में मनाया जाता है। नौ दिनों तक देवी के अनके रुपों की पूजा की जाती है।  (दुर्गा, काली या वैष्णोदेवी) के भक्त नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं(लड़कियों) की पूजा करते हैं। कन्या पूजन में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है। छोटी लड़कियों की पूजा करने के पीछे बहुत सरल कारण छिपा है।

धर्म और आस्था के नाम पर लोग लाखों खर्च कर देते है। ऐसे कुछ निकले ना निकले, लेकिन भगवान के नाम पर हजारों खर्च निकाल देते है। भगवान से जुड़ा कोई चमत्कार हो जाए तो लोगों की आस्था और भी जुड़ जाती है।

स्कंदमाता दुर्गा मां का 5वां रूप है। कहते हैं कि मां के रूप की पूजा करने से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाते हैं। स्कंद कुमार कार्तिकेय की मां होने के कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता  है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। 

नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के 9 रूपों की उपासना की जाती है। इसका दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी का होता है, जिन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। कठिन तपस्या करने के कारण देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम  दिया गया।

जयपुर:हिन्दू धर्म में विश्वकर्मा को सृजन का देवता माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को ही देव शिल्पी के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं भगवान विश्वकर्मा के द्वारा ही की गई थी।पौराणिक युग के सभी अस्त्र-शस्त्र भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाए थे।

हनुमान को शिवावतार या रुद्रावतार भी माना जाता है। रुद्र आंधी-तूफान के अधिष्ठाता देवता भी हैं और देवराज इंद्र के साथी भी। विष्णु पुराण के अनुसार रुद्रों का उद्भव ब्रह्माजी की भृकुटी से हुआ था। हनुमानजी वायुदेव और मारुति नामक रुद्र के पुत्र थे।

देवाधिदेव शंकर के इस अपमान से लज्जित होकर गौरा देवी इस यज्ञ के दौरान सती हो गई थी और भगवान शंकर उनके पार्थिव शरीर को ही गोद में उठा कर तीनों लोकों का भ्रमण कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने भगवान शंकर का मां गौरी से ध्यान हटाने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से मां गौरी के पार्थिव शरीर के टुकड़े कर दिया था।

हमारे धर्म ग्रंथों में देवियों के महात्मय का भी वर्णन  है। जिन्होंने अपने  पतियों के लिए हजारों साल तप किया तो उन्हें पति रुप में पाया है। मां पार्वती, माता सती, माता सीता सबने पति की सलामती के लिए कठोर तपस्या कर सतीत्व का वरदान पाया है।  ये तो हुई सतयुग की बातें, आज भी  महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत पूजा पाठ करती हैं।

कृष्ण को लेने के लिए कंस ने रथ भेजा था। जिसके आते ही सभी ने उस रथ के आसपास घेरा बना लिया। ये सोचकर कि वे कृष्ण को जाने नहीं देंगे। उधर कृष्ण को राधा की चिंता सताने लगी। वे सोचने लगे कि जाने से पहले एक बार राधा से मिल लें। इसलिए मौका पाते ही वे छिपकर वहां से निकल गए।