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हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक के रूप में दो त्योहार मनाये जाते हैं। पहला रक्षाबंधन जो कि सावन मास की पूर्णिमा को होता है।भाई दूज का त्योहार भाई और बहन के प्यार को सुदृढ़ करने का त्योहार है। यह त्योहार दीवाली से दो दिन बाद मनाया जाता है

मास- कार्तिक, पक्ष- कृष्ण, वार-रविवार , तिथि अमावस्या, राहुकाल- प्रात: 4:27 से 17.52 तक, सूर्योदय – 06:29, सूर्यास्त – 17:52।ग्रहों की स्थिति-राहु मिथुन राशि में हैं। कन्या में मंगल और चंद्रमा लक्ष्मी योग बना रहे हैं। यह बहुत अच्छी स्थिति है। इसी लक्ष्मी योग का सबको इंतजार रहता है।

दिवाली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है।  साधारणतया जब पूजा की जाती है तो लक्ष्मी पूजन के साथ भगवान विष्णु की पूजा होती है लेकिन दिवाली को लक्ष्मी और गणेश की पूजा की जाती है। शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इस दिन लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है। इस बारे में एक मान्यता है।

दिवाली 27 अक्टूबर को है जिसकी तैयारी शुरु हो गई। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए लोग अभी से साफ-सफाई खरीददारी शुरु कर दिए है। दीपो का त्योहार दीपावली हिंदूओंं का सबसे बड़ा त्योहार है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी  घर आती है

इस दिन महिलाएं पूरे दिन अपने पति के लिए व्रत रखती हैं और दुल्हन की तरह सज कर चांद की पूजा करती हैं। दुल्हन की तरह सजी महिलाओं के हाथ में अगर बेरंग पूजा की थाली हो तो अच्छा नहीं लगेगा। इस बार करवा चौथ पर खुद तैयार होने से पहले अपनी पूजा की थाली की भी सजावट कर लें।

जिंदगी में कई परेशानियां आती है। कभी आर्थिक समस्या तो कभी काम की समस्या को लेकर । कभी बनते-बनते काम बिगड जाते है तो कभी मेहनत के बावजूद भी तरक्की नहीं मिलती है। ऐसी एक नहीं, दो नहीं बल्कि ना जाने कितनी ही परेशानियां हमारे जीवन में आती रहती है।

शरद पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है। इस रात चन्द्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। इसलिए इस रात को खीर बनाकर खुले आसमान के तले रखा जाता है।

दुर्गा जी का सातवां स्वरूप कालरात्रि है। इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहते हैं। असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है,

 यदि कोई काम नहीं बन रहा,आप परेशान हो,अच्छाई के बाद भी बुराई मिलती है, व्यापार नहीं चल रहा, काम में मन नहीं लगता तो आप नवरात्र में एक उपाय करें, जिससे आपकी परेशानी का हल मिलेगा। भगवती की इच्छा से आपके सारे काम बन जाएंगे।  

अगर नवरात्रि में कुछ भूल चूक हो गई हो तो कोई बात नहीं, अभी नवरात्रि के महत्वपूर्ण उत्तम दिन आने वाले हैं। गुरुवार से पंचमी तिथि शुरू हो रही है। आप अपनी राशि के अनुसार मां के चरण में ये चीजें अर्पित कर सकती है।  नवरात्रि मां के श्रीचरण में नौ दिन अलग-अलग ये चीजें अर्पित करने से मां की असीम कृपा भक्तों को मिलती है।