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जब हमारे अपने हमारा साथ छोड़कर चले जाते है तो हमें उनकी कमी हमेशा खलती है। कोई चाहकर भी इस कमी को पूरा नहीं कर पाता है। 15 दिनों के पितृपक्ष में हम खुद को अपने पूर्वजों के निकट पाते है वो दूर रहकर भी आत्मा से हमसे जुड़ जाते है।

बच्चे जिद्दी और गुस्सैल स्वभाव के आजकल होते जा रहे हैं। जिसके कारण माता-पिता को काफी मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। शास्त्रों के ज्ञाता मानते हैं कि इस समस्या का समाधान संकट मोचक भगवान हनुमान की आराधना से संभव हो सकता है।

श्रृंगार में  महिलाओं को पहली पसंद ज्वेलरी होती है। सोने व चांदी की ज्वेलरी अधिकतर महिलाओं के पास देखने को मिल जाएगी। शादी के बाद सोलह श्रृंगार सोने की ज्वेलरी पहनना हर औरत की पहली पंसद होती है।

श्राद्ध के समय पितर लोक से पूर्वज आते हैं। उनका आशीर्वाद बना रहे इसके लिए पूर्वजों का श्राद्ध  किया जाता है। इन दिनों में पूर्वजों की आत्मा धरती पर आती हैं और भोग लगाने से उन्हें संतुष्टि होती हैं। इससे प्रसन्न होकर पित्तर अपना आशीर्वाद देते हैं। इ

हार्ट लाइन आपके रिलेशनशिप और आपकी लव लाइफ के बारे में कई गुप्त बातें बताती है। हस्तरेखा विशेषज्ञ के अनुसार लव लाइफ के पहले के बारे में भी जानकारी हासिल की जा सकती है। यह रेखा इंडेक्स फिंगर के नीचे से शुरू होती है

सौभाग्य से जुड़ा हरितालिका तीज का व्रत स्त्रियों और कुंवारी कन्याओं द्वारा किया जाता है। इस पावन व्रत में भगवान शिव, माता गौरी, एवं श्री गणेश जी की विधि-विधान से पूजा साधना-अराधना का बड़ा महत्व है। यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता है। सुहाग के सौभाग्य या फिर एक बेहतर जीवनसाथी की कामना के लिए

कृष्ण जी भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते भी थे कि कंस मामा उन्हें बार-बार मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहते थे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंह तोड़ जवाब दिया। इससे सीख मिलती है कि कठिन समय में भी अपने शान्त स्वभाव का त्याग नहीं करना चाहिए।

रुद्र संहिता में शिव-पार्वती के विवाह कथा का वर्णन है साथ ही उसमें यह भी बताया गयै है कि पतिव्रता पत्नी को वैवाहिक नियमों का पालन जीवनपर्यंत करना चाहिए । इन नियमों का पालन खुद माता पार्वती ने भी किया थाय़ उन्हें ये नियम एक पतिव्रता ब्राह्मण पत्नी ने विदाई के समय मां पार्वती को बताया था।

सावन की पूर्णिमा के दिन 15 अगस्त को रक्षा बंधन है इस बार के रक्षा बंधन ना तो भाई न ही बहन के लिए कोई इंतजार है। इस बार खास बात ये है कि दिनभर भाइयों कलाईयां बहनों की राखियों से सजती रहेगी। इस बार रक्षाबंधन भद्रा से मुक्त है। इसलिए सूर्यास्त से पहले तक राखी बांध सकते है।इस बार भद्राकाल न होने से पूरे दिन मुहूर्त रहेगा।

कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।