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कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।  

जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार मान गया है। रथ यात्रा इस महीने आषाढ़ शुक्ल द्वितीया यानि 4 जुलाई 2019 को है।रथयात्रा में नारायण या शालीग्राम की पूजा और आरती का भी विधान है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की पूजा में भोग भी विशेष महत्व है। चाहें तो रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को भोग के लिए नारियल भी चढ़ा सकते हैं।

यहां बनाया जाने वाला हर पकवान हिंदू धर्म पुस्तकों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ के लिए तैयार किया गया भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। भोग में किसी भी रूप में प्याज और लहसुन का भी प्रयोग नहीं किया जाता। भोग बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है।

माता-पिता के लिए संतान सुख दुनिया का सबसे बड़ा सुख होता है। किसी कारण से संतान सुख में बाधा आ रही है तो सोने से पहले पत्नी के सिरहाने में कुछ ऐसा रखने की सलाह दी जाती है,इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए वास्तु में कुछ उपाय बताए गए हैं।  

 तिथि – द्वादशी – 06:13:01 तक, त्रयोदशी – 28:57:58 तक, नक्षत्र – कृत्तिका – 10:01:31 तक,,करण – तैतिल – 06:13:01 तक, गर – 17:40:19 तक,,पक्ष – कृष्ण,,योग – शूल – 19:54:49 तक,,वार – रविवार,,माह – आषाढ़,,सूर्योदय – 05:26:16,,सूर्यास्त – 19:22:59

12 राशियों की यात्रा पूरी करने में चंद्रमा को 28 दिन लगते हैं। 27 जून आज से चंद्रमा  मेष राशि में प्रवेश कर रहा है। इस राशि में प्रवेश से चंद्रमा को  मिथुन व कर्क राशि के जातक और सिंह व मीन राशि के जातक को सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है। ढाई दिनों का मेष राशि में प्रवेश का 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा जानते हैं....

जयपुर: घर का वास्तु कहीं न कहीं पति-पत्नी के रिश्तों पर भी प्रभाव डालता है। अगर घर में सब कुछ उचित है और सभी चीजें वास्तु के अनुसार है तो पति-पत्नी का रिश्ता मधुर रहता है। लेकिन यदि पति-पत्नी का रिश्ता ठीक नहीं है और आए दिन लड़ाइयां होती रहती है, बात-बात पर विवाद होने लगा है …

मैत्रायणी संहिता में नारद को आचार्य के रूप में सम्मानित किया गया है। कुछ स्थानों पर नारद का वर्णन बृहस्पति के शिष्य के रूप में भी मिलता है। अथर्ववेद में भी अनेक बार नारद नाम के ऋषि का उल्लेख है। भगवान सत्यनारायण की कथा में भी उनका उल्लेख है।

यदि पर्वत अधिक उभार वाला हो और रेखा कटी या टूटी हो तो व्यक्ति अभिमानी, स्वार्थी, क्रूर, कंजूस और अविवेकी होता है। यदि हथेली में सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हो तो व्यक्ति जज एवं सफल अधिवक्ता होता है

अंगूठे पर चक्र का निशान हो तो वह व्यक्ति बहुत भाग्यशाली कहलाता है। उसका कोई भी काम नहीं रुकता है। उसको सफलता बड़ी जल्दी मिलती है और अपने क्षेत्र का महारथी माना जाता है।अगर किसी की हथेली पर सूर्य रेखा निकलकर गुरु पर्वत की ओर जाती है