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कृष्ण जी भगवान विष्णु के अवतार थे और वे यह बात जानते भी थे कि कंस मामा उन्हें बार-बार मारना चाहते थे, फिर भी वे शांत रहते थे और समय आने पर कंस के हर प्रहार का मुंह तोड़ जवाब दिया। इससे सीख मिलती है कि कठिन समय में भी अपने शान्त स्वभाव का त्याग नहीं करना चाहिए।

रुद्र संहिता में शिव-पार्वती के विवाह कथा का वर्णन है साथ ही उसमें यह भी बताया गयै है कि पतिव्रता पत्नी को वैवाहिक नियमों का पालन जीवनपर्यंत करना चाहिए । इन नियमों का पालन खुद माता पार्वती ने भी किया थाय़ उन्हें ये नियम एक पतिव्रता ब्राह्मण पत्नी ने विदाई के समय मां पार्वती को बताया था।

सावन की पूर्णिमा के दिन 15 अगस्त को रक्षा बंधन है इस बार के रक्षा बंधन ना तो भाई न ही बहन के लिए कोई इंतजार है। इस बार खास बात ये है कि दिनभर भाइयों कलाईयां बहनों की राखियों से सजती रहेगी। इस बार रक्षाबंधन भद्रा से मुक्त है। इसलिए सूर्यास्त से पहले तक राखी बांध सकते है।इस बार भद्राकाल न होने से पूरे दिन मुहूर्त रहेगा।

कच्चा दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि सावन में कढ़ी नहीं खानी चाहिए। ये चीजें वात दोष बढ़ा देते हैं जिससे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकता हैं। इन सभी चीजों को भगवान को तो अर्पित करनी चाहिए लेकिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।  

जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार मान गया है। रथ यात्रा इस महीने आषाढ़ शुक्ल द्वितीया यानि 4 जुलाई 2019 को है।रथयात्रा में नारायण या शालीग्राम की पूजा और आरती का भी विधान है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की पूजा में भोग भी विशेष महत्व है। चाहें तो रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को भोग के लिए नारियल भी चढ़ा सकते हैं।

यहां बनाया जाने वाला हर पकवान हिंदू धर्म पुस्तकों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बनाया जाता है। भगवान जगन्नाथ के लिए तैयार किया गया भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। भोग में किसी भी रूप में प्याज और लहसुन का भी प्रयोग नहीं किया जाता। भोग बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता है।

माता-पिता के लिए संतान सुख दुनिया का सबसे बड़ा सुख होता है। किसी कारण से संतान सुख में बाधा आ रही है तो सोने से पहले पत्नी के सिरहाने में कुछ ऐसा रखने की सलाह दी जाती है,इसके अलावा संतान प्राप्ति के लिए वास्तु में कुछ उपाय बताए गए हैं।  

 तिथि – द्वादशी – 06:13:01 तक, त्रयोदशी – 28:57:58 तक, नक्षत्र – कृत्तिका – 10:01:31 तक,,करण – तैतिल – 06:13:01 तक, गर – 17:40:19 तक,,पक्ष – कृष्ण,,योग – शूल – 19:54:49 तक,,वार – रविवार,,माह – आषाढ़,,सूर्योदय – 05:26:16,,सूर्यास्त – 19:22:59

12 राशियों की यात्रा पूरी करने में चंद्रमा को 28 दिन लगते हैं। 27 जून आज से चंद्रमा  मेष राशि में प्रवेश कर रहा है। इस राशि में प्रवेश से चंद्रमा को  मिथुन व कर्क राशि के जातक और सिंह व मीन राशि के जातक को सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है। ढाई दिनों का मेष राशि में प्रवेश का 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा जानते हैं....

जयपुर: घर का वास्तु कहीं न कहीं पति-पत्नी के रिश्तों पर भी प्रभाव डालता है। अगर घर में सब कुछ उचित है और सभी चीजें वास्तु के अनुसार है तो पति-पत्नी का रिश्ता मधुर रहता है। लेकिन यदि पति-पत्नी का रिश्ता ठीक नहीं है और आए दिन लड़ाइयां होती रहती है, बात-बात पर विवाद होने लगा है …