atal bihari vajpayee

केन्द्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जब आज पूर्व नौकरशाह जगमोहन से मिले तो कई सालों बाद राजनीतिक क्षेत्र के लोगों ने उनकी कार्यशैली की चर्चा की और इंदिरा गांधी के जमाने से लेकर अटल सरकार तक के कार्यकाल को याद करने लगे।

अपने बयानों की वजह से हमेशा चर्चा में रहने वाली बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार भोपाल से बीजेपी सांसद ने विपक्ष पर बड़ा आरोप लगाया है। बीजेपी नेताओं की मौत पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने शंका जाहिर किया है।

पिछले साल 16 अगस्त को पार्टी के शीर्षस्थ नेता एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी के निधन के बाद अनन्त कुमार, मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज और आज अरुण जेटली का निधन हो गया।

पीएम मोदी के जेटली और स्वराज के साथ काफी अच्छे संबंध थे। जेटली और सुषमा स्वराज ने मोदी सरकार-1 में केंदीय मंत्री थे। कहा जाता है पीएम मोदी को बनाने वाले अरुण जेटली ही थे। आज जिस मुकाम पर पीएम मोदी हैं, उसमें कहीं न कहीं जेटली का भी हाथ है।

महापौर ने कहा कि लखनऊ शहर अटल जी की संसदीय क्षेत्र रहा है और उनका हमेशा से प्रयास रहा कि लखनऊ पर्यावरण व साफ सफाई के दृष्टि एक नम्बर पर रहे।

अटल जी की कोई वसीयत अभी सामने नहीं आई है लेकिन यदि कानून की बात करें तो वर्ष 2005  संशोधित हिन्दू उत्तराधिकार कानून के मुताबिक संपत्ति उनकी दत्तक पुत्री नमिता और दामाद रंजन भट्टाचार्य को मिल सकती है।

साल 2014 में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया। बता दें, अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले प्रधानमंत्री थे, जोकि तीन बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं। उनकी सबसे पहली सरकार महज 13 दिनों तक ही चल पाई थी।

वह 2009 में हुए आमचुनाव में कर्नाटक के बैंगलुरू दक्षिण चुनाव क्षेत्र से 15वीं लोकसभा के लिए सदस्य निर्वाचित हुए थे। मोदी सरकार में उन्हें रसायन और उर्वरक मंत्रालय और संसदीय मामलों का मंत्री पद मिला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो अब पूरा हुआ है। अब देश के सभी नागरिकों के हक़ और दायित्व समान हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के राजधानी में अस्थि विसर्जन कार्यक्रम का पूरा खर्च सूचना विभाग लखनऊ विकास प्राधिकरण को देगा। शासन स्तर पर निर्णय के बाद सूचना विभाग की ओर से एलडीए को इस सम्बन्ध में पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है।