ayodhya case

रामजन्मभूमि मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद प्रशासन ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए दी जाने वाली 5 जमीनों की पहचान कर ली है। ये पांचों जमीनें अयोध्या के पंचकोसी परिक्रमा के बाहर हैं।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) बिल को लेकर प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच धार्मिक नगरी अयोध्या में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमे की नमाज अदा की गई।

याचिका में विवादित अधिगृहीत 2.77 एकड़ जमीन के बाहर अखाड़े के स्वामित्व वाले कई मंदिरों को वापस करने की मांग भी की गई है।

अयोध्या मामले में गुरूवार को  दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई होगी। देश के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली 5 जजों की पीठ इस मामले  में फिर सुनवाई करेगी। इस केस में चीफ जस्टिस के साथ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और संजीव खन्ना सुनवाई करेंगे।

अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई पहली पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि अयोध्या की विवादित भूमि को हिंदू पक्ष को देना उन्हें बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए ईनाम देने जैसा है।

जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष दिसंबर के पहले सप्‍ताह में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर कर सकता है। एआईएमपीएलबी ने कहा कि मामले को आगे बढ़ाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड का फैसला कानूनी रूप से हमें प्रभावित नहीं करेगा।

मुख्यमंत्री ने बैंकों, करेंसी चेस्ट, ए0टी0एम0, ग्राहक सेवा केन्द्रों आदि की सुरक्षा के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, रेंज व जोनल पुलिस अधिकारियों से कहा कि इन स्थलों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो।

सवाल है, तो क्या आज फिर कुछ भारतीय मुसलमान एक टूटे ढांचे की आड़ में राष्ट्र को काटेंगे ? मन्दिर विरोध को आधार बनाकर फिर 1947 को दुहराया जायेगा? भारतीयों को जवाब चाहिए|

वहीं अब खबर आ रही है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर 26 नवंबर को आखिरी फैसला देने के लिए कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि सरकार द्वारा दी गई जमीन को मुस्लिम पक्ष नहीं लेगा।