Ayodhya Ram Mandir Case

विश्‍व हिंदू परिषद (वीएचपी) और निर्मोही अखाड़ा ने अयोध्‍या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद की आलोचना की है।

6 दिसम्बर 1992 केा अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराये जाने के मामले में लखनऊ की एक विशेष अदालत में चल रहे आपराधिक केस में अप्रैल 2020 तक फैसला आ सकता है।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में योग गरु बाबा रामदेव, हिन्दू धर्म आचार्य सभा के संयोजक स्वामी परमात्मानंद सहित कई नेता पहुंचे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हिंदुओं के लिहाज से आज का दिन बहुत अच्छा रहा, कोर्ट के इस फैसले ने 200 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद क्या संघ काशी और मथुरा में भी ऐसे ही आंदोलन करेगा, इस पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ आंदोलन करने वाला संगठन नहीं है। वह इंसान सृष्टि करने वाला संगठन है।

अयोध्या में विवादित ज़मीन (राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। इस मसले पर सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता से लेकर संत समाज और सभी समुदाय के धर्म गुरुओं ने भी शांति-व्यवस्था और सौहार्द बनाये रखने की अपील जनता से की है।

अजमेर के प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के दरगाह दीवान ने भी लोगों से अपील की है, दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन चिश्ती ने सभी से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की अपील की है।

अयोध्या फैसले को देखते हुए प्रदेश में धारा 144 लागू है। इसके साथ ही फैसला सुनाने वाले मुख्य न्यायधिशों को z प्लस सुरक्षा दी गई है। साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा में लगे अर्ध्दसैनिक बलों की संख्या में कई गुना ईजाफा किया गया है।