Ayodhya verdict

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में योग गरु बाबा रामदेव, हिन्दू धर्म आचार्य सभा के संयोजक स्वामी परमात्मानंद सहित कई नेता पहुंचे हैं।

फैसले के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आज अयोध्या मामले में सुनवाई करने वाले जजों को डिनर देंगे। यह डिनर दिल्‍ली के ताजमान सिंह होटल में आयोजित किया गया है। डिनर में CJI के साथ जस्टिस बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस DY चन्द्रचूड़ और जस्टिस नज़ीर शामिल होंगे।

कई सालों से जिस फैसले का सभी को इंतेजार था। आज शनिवार 9 नवंबर को अयोध्या मामलें पर फैसला आ गया है। फैसला आने के बाद बहुत लोग खुश हैं तो कुछ लोग दुखी भी हैं।

जब अयोध्या मामले की सुनवाई चल रही थी तब हबीबुद्दीन तुसी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की इच्छा जाहिर की थी। तुसी ने कहा था कि अगर अयोध्या में राम मंदिर बनता है तो उनका परिवार इसकी पहली ईंट रखेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हिंदुओं के लिहाज से आज का दिन बहुत अच्छा रहा, कोर्ट के इस फैसले ने 200 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया है।

एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस इत्तिहादुल मुस्लमिन) नेता असदुद्दीन ओवैसी सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले असहमत है। अयोध्या पर आए फैसले पर ओवैसी ने कहा कि हम फैसले से संतुष्ट नहीं।

  नई दिल्ली: राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज (9 नवंबर) को फैसला सुना दिया है। फैसला हिंदू पक्ष में गया है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अयोध्या में रामलला जीत गए हैं। वहीं, इस मुद्दे पर देश के साथ-साथ विदेशी मीडिया की भी निगाहें बनी हुई थीं। सुप्रीम …

कालांतर में इस कौशल प्रदेश के दो हिस्‍से हो गए। उत्‍तर कौशल और दक्षिण कौशल। इन दोनों प्रदेशों को सरयू नदी बांटती थी। रामायण ग्रंथ के अनुसार में अयोध्‍या का उल्‍लेख कौशल प्रदेश की राजधानी के रूप में किया गया था। हालांकि पुराणों में इस नगर के बारे में कोई खास विवरण नहीं मिलता। साक्ष्‍यों के मुताबिक राम के जन्‍म के वक्‍त यह नगर अवध नाम से जाना जाता है। मौजूदा समय में यह अयोध्‍या से नाम जाना जाता है।

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, ‘इस बात के सबूत नहीं हैं कि मुस्लिमों ने मस्जिद का त्याग कर दिया था। हिंदू हमेशा से मानते रहे हैं कि मस्जिद का भीतरी हिस्सा ही भगवान राम की जन्मभूमि है। यह साबित हुआ है कि मुस्लिम ढांचे के भीतर इबादत करते थे और मुस्लिम उसके बाहर पूजा करते थे।’