black money

 साल 2014-15 ,1,038 करोड़ रुपये का कालाधन हांगकांग भेजने के आरोप में 51 कंपनियों के खिलाफ नामजद किया है।  सीबीआई के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी है।

कालाधन को लेकर मोदी सरकार ने सख्त रूप अपनाया हुआ है। अब इस मामले में सरकार को बड़ी सफलता मिला है। भारत और स्विट्जरलैंड के टैक्स अधिकारियों ने ऐसे ट्रस्टों की पहचान की है।

एनसीआर के एक रियल स्टेट से 3 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की बेनामी संपत्ति मिली हैजिसकी बात कबूल की  गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापेमारी में इसका खुलासा हुआ। सोमवार को सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स) ने यह बात बताई है।

स्विस बैंकों में खाता रखने वाले भारतीयों की धीरे धीरे पोल खुल रही है। स्विस बैंकों में ब्लैक मनी रखने वाले लोगों की मुश्कीलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही है

आज नोटबंदी को तीन साल पूरे हो गये हैं। आज ही के दिन 8 नवंबर 2016 की रात पीएम मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की थी।

मोदी सरकार को विदेशों में छिपाए गए 500 बिलियन डॉलर को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के उच्च स्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी) ने कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में सरकारी पैनल ने केंद्र को एलिफैंट बांड लाने की सलाह दी है।

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद सिस्टम में २ हजार का नोट लाया गया था। मकसद था काले धन और नकदी की जमाखोरी पर लगाम लगाना। अपने मकसद में फेल रहने और पुरानी समस्याओं को ही बढ़ावा देने के कारण २ हजार के नोट की छपाई बंद कर दी गई है। इस वित्तीय वर्ष में अभी …

भारतीयों का काला धन स्विस बैंक से जुड़े होने की जानकारी मिलने के बाद से दुनिया के सबसे तेज प्लेटफॉर्म यानी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट में यह दावा भी किया जा रहा है कि भारत को स्विस बैंक से सिर्फ 31 लाख खातों के बारें में जानकारी प्राप्त हो पाई है।

भारत के लोग अपने कालेधन की रक्षा के लिए भारत की नागरिकता तक छोड़ देते हैं और ऐसे देशों की नागरिकता पैसे देकर खरीद लेते हैं, जिनकी हैसियत भारत के किसी जिले के बराबर भी नहीं है। विदेशों में छिपाया धन सिर्फ वही नहीं होता, जो बाकायदा कमाया हुआ होता है बल्कि वह भी होता है, जो रिश्वत, ब्लेकमेल, आतंक, डकैती, चोरी आदि कुकर्मों से जमा किया जाता है।

संसद की एक समिति द्वारा सोमवार को प्रस्तुत रपट के अनुसार भारत के नागरिकों द्वारा विदेशों में जमा अघोषित धन सम्पत्ति 1980 से 2010 के विभिन्न काल खंडों में 216.48 अरब डालर से 490 अरब डालर के बीच रहने का अनुमान है।