black money

आज नोटबंदी को तीन साल पूरे हो गये हैं। आज ही के दिन 8 नवंबर 2016 की रात पीएम मोदी ने देश में नोटबंदी की घोषणा की थी।

मोदी सरकार को विदेशों में छिपाए गए 500 बिलियन डॉलर को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के उच्च स्तरीय सलाहकार समूह (एचएलएजी) ने कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों में सरकारी पैनल ने केंद्र को एलिफैंट बांड लाने की सलाह दी है।

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद सिस्टम में २ हजार का नोट लाया गया था। मकसद था काले धन और नकदी की जमाखोरी पर लगाम लगाना। अपने मकसद में फेल रहने और पुरानी समस्याओं को ही बढ़ावा देने के कारण २ हजार के नोट की छपाई बंद कर दी गई है। इस वित्तीय वर्ष में अभी …

भारतीयों का काला धन स्विस बैंक से जुड़े होने की जानकारी मिलने के बाद से दुनिया के सबसे तेज प्लेटफॉर्म यानी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट में यह दावा भी किया जा रहा है कि भारत को स्विस बैंक से सिर्फ 31 लाख खातों के बारें में जानकारी प्राप्त हो पाई है।

भारत के लोग अपने कालेधन की रक्षा के लिए भारत की नागरिकता तक छोड़ देते हैं और ऐसे देशों की नागरिकता पैसे देकर खरीद लेते हैं, जिनकी हैसियत भारत के किसी जिले के बराबर भी नहीं है। विदेशों में छिपाया धन सिर्फ वही नहीं होता, जो बाकायदा कमाया हुआ होता है बल्कि वह भी होता है, जो रिश्वत, ब्लेकमेल, आतंक, डकैती, चोरी आदि कुकर्मों से जमा किया जाता है।

संसद की एक समिति द्वारा सोमवार को प्रस्तुत रपट के अनुसार भारत के नागरिकों द्वारा विदेशों में जमा अघोषित धन सम्पत्ति 1980 से 2010 के विभिन्न काल खंडों में 216.48 अरब डालर से 490 अरब डालर के बीच रहने का अनुमान है।

मोदी सरकार के एक बार फिर सत्ता में वापसी के बाद स्विट्जरलैंड ने उसके बैंकों में खाता रखने वाले भारतीयों के संबंध में सूचनाएं शेयर करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अकेले पिछले हफ्ते ही करीब एक दर्जन भारतीयों को इस संबंध में नोटिस दिया गया है।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इलेक्टोरल बॉन्ड का बचाव करते हुए कहा कि इनका मकसद चुनावों के वित्तपोषण में काले धन के प्रयोग पर रोक लगाना है जैसा कि संप्रग-2 के शासनकाल के दौरान इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाने के प्रस्ताव के जरिए करने की कोशिश की गई थी।

आधी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना चेन्नै में वर्ष 2014 में हुई। कंपनी ने कई तरह के कारोबार में हाथ डाला और तेजी से तरक्की की लेकिन कई दागी नेताओं से रिश्तों और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के चलते कंपनी जांच एजेंसीज के निशाने पर आ गई।

पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने विदेशों से लाए गए काले धन से जुड़ी जानकारी देने से इंकार कर दिया है। आपको बता दें, केंद्रीय सूचना आयोग ने 16 अक्टूबर को पीएमओ को 15 दिनों में काले धन से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा था।