bombay high court

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि दंपती की छह वर्षीय बेटी का बयान भरोसा करने लायक है। कोर्ट ने ये भी कहा कि महिलाओं की सामाजिक स्थितियों के कारण वे स्वयं को अपने पतियों को सौंप देती हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग के कपड़े उतारे बिना उसको छूना यौन शोषण नहीं माना जा सकता। इसको पोक्सो एक्ट  के तहत यौन शोषण के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने निकिता जैकब की गिरफ्तारी पर तीन हफ्ते तक के लिए रोक लगा दी है। इससे पहले कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने शांतनु मुलुक को दस दिन की अग्रिम ट्रांजिट जमानत दी थी।

बता दें कि आरोप है कि निकिता और शांतनु दोनों खालिस्तानी समर्थकों के साथ संपर्क में थे और उनके ही इशारे पर टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट क्रिएट किया था। जानकारी के मुताबिक, शांतनु के ई-मेल अकाउंट से टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट बनाया गया था। जिसे निकिता और दिशा ने एडिट किया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह की बहनें मीतू और प्रियंका को बड़ा झटका दिया है। दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती ने इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति एक साल तक अविनाश घरोटे की पीठ ने फैसला सुनाते हुए यह निर्देश भी दिया है कि भ्रूण (Fetus) के DNA को जांच के लिए एक साल तक सीलबंद कर सुरक्षित (Safe) रखा जाए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट का इस मामले में कहना है कि पत्नी से पैसे मांगना आईपीसी की धारा 498A के तहत उत्पीड़न का मामला नहीं हो सकता है। ऐसे में मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उस शख्स को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

यौन शोषण के मामले में बंबई हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने माना है कि POCSO अधिनियम 2012 'यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा के तहत' एक लड़की का हाथ पकड़ना और पैंट की ज़िप खोलना यौन शोषण की परिभाषा में नहीं आएगा।

जज पुष्पा गनेडीवाला ने अपने फैसले में कहा था कि यौन उत्पीड़न की घटना मानने के लिए यौन इच्छा के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले पर स्टे लगा दिया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी नाबालिग को निर्वस्त्र किए बिना, उसके स्तन को छूना, यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि इस तरह का कृत्य पोक्सो अधिनियम के तहत यौन हमले के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।