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पूर्वी उत्तरप्रदेश के कई जिलों में किसान अब इसकी खेती करने लगे है और बाज़ारों में कभी कभी मिल जाता है। यह बिना कीटनाशक के पैदा होता है जिसे लोग बरसात में खाते थे। आज की आधुनिकता में गावों में भी इस साग को लोग भूलते जा रहे हैं।

परंतु यह क्या- कूच क़ाच की आवाज़ तो कचकुचवा (उल्लू) ने दी थी और आशीर्वाद ले गया भुज़ेटा। सीधा- साधा उल्लू सतर्क करके उड़ गया क्योंकि सुबह होने के पहले उसे अपने घोंसले में पहुँचना था। लेकिन आशीर्वाद तो चालक भुज़ेटा ले गया तो ले गया।

ढेका, सिल- बट्टा, ओखली - मूसल, चकिया, जाँता, समाप्त हो गये जो घर के जीवनयापन के यंत्र थे, जिससे भरपूर व्यायाम हो जाता था। इन्हीं कारणों से गावों में मधुमेह , हार्ट- अटैक, रक्तचाप, कैंसर की बीमारी आम हो गयी है। काश आधुनिकता के साथ हमारे जीवन जीने के तरीक़े में इतना बदलाव न होता तो हम स्वस्थ जीवन के साथ अपने पुरखों की तरह मस्त और निरोग होते।

मुझे और मेरे सहयोगी एसआई बृज़पाल सोलंकी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा बहादुरी के लिए पुलिस मेडल प्रदान किया गया था। दिल्ली सरकार ने भी मुझे एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया था। मै उस समय के कुछ फ़ोटो भी शेयर कर रहा हूँ जो मुठभेड़ स्थल पर लिए गये थे।