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गठवाला खाप से बड़ी संख्या में लोग गाजीपुर बॉर्डर जा रहे हैं। उनका केवल और केवल एक ही मकसद है जब तक यह तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक धरना बदस्तूर जारी रहेगा।

केंद्र सरकार की जारी ईज ऑफ लिविंग (जीवन जीने की सुगमता) रिपोर्ट 2020 इसकी तस्दीक कर रही है। 2018 में रिलीज हुई रिपोर्ट में लखनऊ की देशभर में रैंकिंग 73 थी।

केंद्र सरकार ने अब कार में फ्रंट एयरबैग को जरूरी बनाने(Airbag mandatory) के सख्त निर्देश देने जा रही है। ऐसे में अब 1 अप्रैल से हर गाड़ी में ड्राइवर के साथ साथ को-पैसेंजर साइड में भी एयरबैग देना बेहद अनिवार्य होगा।

दिल्ली में कुकिंग गैस की कीमतें मई 2020 में 581.5 रुपये प्रति सिलेंडर थीं। जो 1 मार्च 2021 तक बढ़कर 819 रुपये हो गई हैं। इस साल की शुरुआत के दूसरे महीने फरवरी में तीन लगातार बढ़ोतरी को जोड़ें तो एलपीजी सिलेंडर की कीमतें 125 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ी हैं।

सरकार का मकसद साफ है कि इस स्कीम से उपभोक्ता ज्यादा खर्च करेगा, बाजार में उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे जीएसटी कलेक्शन तो होगा ही उत्पादकता भी बढ़ेगा। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था सुधरेगी। इस स्कीम से सरकार ने कर्मचारियों को भी खुश किया है।

पीली धातु यानी सोने को लेकर केंद्र सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की शुरुआत की है। सरकार ने इस योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में की थी। इस योजना का उद्देश्य भौतिक रूप से सोने की मांगों में कमी लाना है। बीते साल महामारी कोरोना संकट के दौर की अपेक्षा अब तक लगभग 8000 रुपये की गिरावट आई है।

नई गाइडलाइन्स के अनुसार डिजिटल मीडिया पर समाचार प्रकाशित करने वालों को प्रेस कौंसिल के नियमों-दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा केबल टीवी नेटवर्क्स नियमन कानून के तहत दिए गए प्रोग्राम संहिता का पालन करना होगा।

नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनरत किसान संगठनों का पैतरा दिन ब दिन बदलता जा रहा है। एक तरफ जहां किसान नेता राकेश टिकैत संसद के घेराव की बात कहकर सरकार के पेशानी पर बल डाल दिया हैं, वहीं सिंघु बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने दूध के दाम में बढ़ोत्तरी करने करने की बात कही है। बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है।

किसानों के लिए बनाए गए कानून को लागू न होने देने के लिए विपक्ष जिम्मेदार है। जिसका सीधा असर आम जनता पर पड रहा है। उन्होेंने कहा कि केन्द्र ने कई कानून किसानों के हित में बनाए हैं।

भारतीय किसान यूनियन नेता, राकेश टिकैत ने मंगलवार को धमकी जारी करते हुए कहा कि अगर तीन कानूनों को रद्द नहीं किया जाता है, तो किसान 40 लाख ट्रैक्टरों को लेकर संसद तक मार्च करेंगे। वह राजस्थान के सीकर में एक किसान रैली को संबोधित कर रहे थे।