Chandrayaan-2

चंद्रयान-2 मिशन की प्रॉजेक्ट डायरेक्टर साइंटिस्ट एम वनिता थीं। लेकिन अब वह चंद्रयान-3 की टीम का हिस्सा नहीं होंगी। वहीं, मिशन चंद्रयान-2 की टीम को लीड करने वाली रितु करिधाल चंद्रयान-3 मिशन को संभालेंगी।

सोमवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को इस साल सितंबर में चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हुए चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का पता लग चुका है।

लेकिन इन सबके बीच चन्द्रयान-2 की ताजा तस्वीरें निश्चित रूप से बहुत ही खुशी देने वाली हैं। लेकिन अब देखना होगा कि क्या लैंडर विक्रम को भी लेकर कोई ताजा जानकारी सामने आती है या नहीं।

दरअसल, नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान उस जगह की कई तस्वीरें अपने कैमरा मे कैद की है, जहां विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिग के जरिए उतरने का प्रयास किया था लेकिन एलआरओसी की टीम लैंडर के

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है। चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का उपयोग करेगा जो दो गड्ढों- मंज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का प्रयास करेगा।

इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स (MOX) की स्क्रीन पर विक्रम लैंडर की लैंडिंग के समय एक ग्राफ नजर आ रहा था, जिसमें विक्रम लैंडर दिख रहा था। इस ग्राफ में तीन रेखाएं दिखाई गई थीं, जिसमें से बीच वाली लाइन पर ही चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर अपना रास्ता तय कर रहा था। वह लाल रंग की लाइन थी।

जानकारी के अनुसार यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने चंद्रयान की तरह ही लूनर लैंडर नाम से एक मिशन की शुरुआत की थी। योजना के तहत 2018 में लूनर लैंडर चांद पर उतरने वाला था। इस मिशन को बजट की कमी की वजह से बीच में रोक दिया गया।