chandrayan 2

इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश में अभी भी लगा हुआ है। बता दें कि पिछले महीने चंद्रमा की सतह पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' की कोशिश के दौरान 'चंद्रयान-2' के लैंडर 'विक्रम' से संपर्क टूट गया था, लेकिन इसरो उससे संपर्क करने की कोशिशें अभी छोड़ी नहीं हैं।

अभी हाल में ही खबर मिली थी कि नासा के जरिए लैंडर विक्रम से संपर्क साधन की कोशिश की जा रही है। लेकिन अब ये कोशिश शायद अंधेरे के साथ डूब जाएगी। दरअसल, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर काली अंधेरी रात होने वाली है, जिसके चलते लैंडर विक्रम से संपर्क करने के लिए की जा रही कोशिशें भी अंधेरे में जा सकती है।

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से चांद की सतह से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद से लगातार इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। दूसरी तरफ अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भी लैंडर विक्रम से संपर्क साधने में इसरो की मदद कर रहा है।

चांद की सतह से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद से ही इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी तरफ अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने में इसरो की मदद कर रहा है।

चन्द्रयान-2 के चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग से 2.1 किलोमीटर पहले ही लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया।

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चांद की सतह से करीब 2 किमी पहले ही इसरो से संपर्क टूट गया। हालांकि उम्मीदें अभी कायम हैं। इसरो के वैज्ञानिकों ने अब भी हिम्मत नहीं हारी है और उनका हौसला बुलंद है।

आज पूरे देश को सिर्फ उस पल का इंतजार है, जब चंद्रयान-2 चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। चंद्रयान-2 शुक्रवार की रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।

आप सभी जानते होंगे कि अमेरिका की नासा ने 16 जुलाई, 1969 को मिशन 'अपोलो 11’ के तहत चंद्रमा पर पहली बार नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को भेजा गया था। जब इंसान ने चांद पर कदम रखा, तो इस कामयाबी के संदर्भ में पृथ्वी के सभी देश काफी खुश नजर आये।

इसरो सोमवार को जरूरी कक्षा में इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट को अलगा करने के लिए कमांड देगा। बता दें, जब स्पेसक्राफ्ट स्थिर हो जाएगा, उसके बाद ही ये कमांड दिया जाएगा। कमांड लेने के बाद अपने आप ही ऑनबोर्ड सिस्टम एग्जिक्यूट करेगा।

उत्तर प्रदेश के दो विद्यार्थी चंद्रमा पर चंद्रयान-2 की लैंडिग के ऐतिहासिक क्षण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देखने के साक्षी बनेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी सितम्बर में इसरो के नियंत्रण-कक्ष, इसरो टेलीमेट्री, ट्रेकिंग एण्ड कमाण्ड नेटवर्क, बंगलुरू में चन्द्रयान-2 को चन्द्रमा की सतह पर उतरते देखेंगे।